क्या बाल शोषण पर जागरूकता बढ़ाने के लिए फिल्मों को माध्यम बनाया जा सकता है?

मनोरंजन हमारी जिंदगी का हिस्सा है और इसके बिना जिन्दगी की कल्पना नहीं किया जा सकता है। मनोरंजन के द्वारा ही जीवन में आए दुख को कम किया जा सकता है मनोरंजन एक तरह से हमारी जिंदगी में खुशियों के रंग भरने का काम करता है। मनोरंजन जिस प्रकार से हमारी जिंदगी से जुड़ा है उसी प्रकार हमारे समाज से भी जुड़ा है। मनोरंजन नाटक, फिल्म, धारावाहिक जैसी चीजें शामिल हैं। और यह सभी चीजें हमारे समाज को बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं। फिल्मों के माध्यम से हम हमारे समाज के अच्छाइयों और बुराइयों को उभार सकते हैं। और अगर हम चाहें तो इसके माध्यम से समाज की बुराइयों को खदेड़ सकते हैं और चाहें तो बुराइयों को समाज में भर भी सकते हैं। आजकल में तो बहुत सी प्रेरणादायक फिल्में भी आई हैं जो समाज में किसी अच्छे काम के लिए जागरूकता बढ़ाने में बहुत सहायक साबित हुई हैं। हाल ही में सुपरस्टार आमिर खान की फिल्म 'दंगल' आई थी जो महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी। यह फिल्म लोगों के बीच एक संदेश लेकर गई और लोगों ने इसको स्वीकारा भी और इसी कारण यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। यह कोई पहली फिल्म नहीं थी जो हमें किसी तरह की प्रेरणा दे रही हो इससे पहले भी उनकी फिल्म 'पीके' आई थी जिसमें इन्सानियत को धर्म के उपर दिखाया गया था। और इसी तरह 'थ्री इडियट्स' जो हमारे एजूकेशन सिस्टम पर बनाई गई थी।

बाल शोषण पर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी जरूरत है फिल्मों की?


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निसंदेह हम यह कह सकते हैं कि अगर ऐसी फिल्म बनाई जाए जो बाल शोषण को गलत दिखाए। तो समाज पर इसका बहुत अच्छा असर पड़ेगा और लोग बच्चों के साथ होने वाली हिंसा से नफरत करने लगेंगे। इसलिए बाल शोषण पर जागरूकता बढ़ाने के लिए फिल्मों को माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। और आने वाले समय में हम लोगों को बाल शोषण रोकने के लिए जागरूक कर सकते हैं। अभी हाल ही में स्वच्छता अभियान को बढ़ाने के लिए 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' फिल्म बनाई गई जिसको दर्शकों ने खूब प्यार दिया। यह देखा जा सकता है कि जितनी भी इस प्रकार की फिल्में होती हैं वह दर्शकों को खूब भाती भी हैं। इसलिए अगर हम फिल्मों के माध्यम से बाल शोषण पर जागरूकता बढ़ाने के लिए फिल्मों को माध्यम बनाएं तो यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा साधन होगा।

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