क्या आप जानते हैं डीप वेब और डार्क वेब के बारे में?

हम और आप इन्टरनेट का प्रयोग तो करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्टरनेट का बहुत बड़ा भाग ऐसा जिसके बारे में हम नहीं जानते और शायद ही हम कभी उसका इस्तेमाल कर पाएं। वास्तव में इन्टरनेट तीन हिस्सों में बंटा हुआ है (1) सर्फेस वेब (Surface Web) (2)डीप वेब (Deep Web) (3)डार्क वेब (Dark Web)

सर्फेस वेब

सर्फेस वेब यह वह इन्टरनेट का साधारण हिस्सा है जिसका हम और आप इस्तेमाल करते हैं। और कोई भी व्यक्ति आसानी से कहीं भी कभी भी इसमें प्रवेश कर सकता है। या हम ऐसे कह सकते हैं कि वह तमाम तरह की जानकारियां जो गूगल सर्च इंजन या किसी भी सर्च इंजन के डेटाबेस में संग्रहित हैं वह सभी सर्फेस वेब का हिस्सा हैं जिसे हम गूगल सर्च या अन्य सर्च इंजन द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार हम तरह तरह की वेबसाइट पर गूगल सर्च इंजन या अन्य सर्च इंजन के माध्यम से प्रवेश करते हैं, चाहे वह सोशल नेटवर्किंग साइट हों या कोई अन्य प्रकार की साइट जैसे फिल्मों गानों की वेबसाइट और वह तमाम तरह की वेबसाइट जिसमें हम आसानी से प्रवेश करते हैं अब चाहे हम किसी सर्च इंजन के माध्यम से पहुंचें या किसी अन्य यह सभी सर्फेस वेब का हिस्सा हैं। आसान शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि जो कुछ भी हम गूगल या अन्य सर्च इंजन द्वारा प्राप्त करते हैं वह सभी सर्फेस वेब का हिस्सा है। यहां तक कि यह जो आप लेख पढ़ रहे हैं यह भी सर्फेस वेब का हिस्सा है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक अध्ययन के अनुसार इन्टरनेट का केवल 5% हिस्सा ऐसा है जो सर्फेस वेब के दायरे में आता है। इसके अलावा इन्टरनेट का 95% हिस्सा डीप वेब कहलाता है। सर्फेस वेब इन्टरनेट के उस भाग को कहते हैं जिसकी जानकारी हर किसी को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती है। लेकिन डीप वेब इन्टरनेट का वह भाग है जो हम से छुपा हुआ है।

डीप वेब

डीप वेब इन्टरनेट का वह हिस्सा है जो इन्टरनेट पर मौजूद तो है लेकिन हर कोई डीप में प्रवेश नहीं कर सकता। ना तो हर किसी को सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी होती है। डीप वेब की किसी भी वेबसाइट या वेब पेज की सूची गूगल या अन्य सर्च इंजन में उपलब्ध नहीं होती है। डीप वेब में अॉनलाइन क्लाउड स्टोरेज से लेकर बड़े बड़े विश्वविद्यालयों के शोध, अनुसंधान और खोज संग्रहित और संरक्षित होते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की बड़ी बड़ी कम्पनियों की जानकारियां, बड़े बड़े बैंकों की फाइलें और सरकारी गुप्त परियोजनाओं की फाइलें मौजूद हैं। और जाहिर सी बात है ऐसी विशेष प्रकार की जानकारियां उनसे संबंधित विशेष लोगों के लिए ही होंगी इसलिए इस प्रकार की जानकारियां किसी सर्च इंजन में मौजूद नहीं होती हैं और यह तमाम जानकारियां डीप वेब के दायरे में आती हैं। डीप वेब में हर किसी का आगमन नहीं हो सकता इसके लिए हमें डीप वेब की किसी वेबसाइट का विशेष प्रकार का यूआरएल चाहिए और साथ साथ उस वेबसाइट में प्रवेश करने के लिए अनुमति चाहिए जो लॉगिन आईडी और पासवर्ड के रूप में भी हो सकती है या किसी अन्य प्रकार के प्रमाणीकरण के रूप में।
डीप वेब को हम हिमपर्वत से समझ सकते हैं हिमपर्वत का सिरा जो पानी के बाहर होता है वह सर्फेस वेब है और बाकी नीचे का हिस्सा डीप वेब है। डीप वेब की तरह इन्टरनेट का एक और बड़ा और छिपा हुआ भाग है जिसे डार्क वेब कहा जाता है।

डार्क वेब

डार्क वेब भी डीप वेब की तरह इन्टरनेट का वह छिपा हुआ हिस्सा जहां हर कोई नहीं पहुंच सकता। और ना ही इसके किसी वेब पेज या वेबसाइट की कोई सूची किसी सर्च इंजन के पास है। डार्क वेब का प्रयोग पूरी तरह से अवैध है क्योंकि डार्क वेब पर बहुत सारे अवैध धंधे होते हैं जैसे ड्रग्स, हिरोइन का सौदा, शरीर के अंगों का बेचने और खरीदने जैसा धंधा होता है। इसके अलावा चाइल्ड पोर्नोग्राफी से लेकर गुंडे भाड़े पर लेने जैसा काम भी होता है। इसके अलावा भी बहुत से गलत और अवैध धंधे डार्क वेब पर होते हैं और इस पर किसी भी प्रकार का गलत काम किया जा सकता है इसलिए डार्क वेब पर प्रवेश करना पूरी तरह से अवैध और गैरकानूनी है और ऐसा करने पर जेल भी हो सकती है इसलिए हम आप से अनुरोध करते हैं कि डार्क वेब तक पहुंचने के लिए कभी सोचियेगा भी नहीं।
डार्क वेब का प्रयोग करने के लिए हमें ‘द अनियन रूटर’ (The Onion Rooter) की जरूरत पड़ती है जिसे टॉर ब्राउज़र भी कहते हैं। यह ब्राउज़र इन्टरनेट पर आपको गुमनाम बना देता है जिससे किसी को आपके स्थान और आपकी आईपी के बारे में जानकारी नहीं हो सकती इसका इस्तेमाल ज्यादातर हैकर्स लोग करते हैं। इसके अलावा डार्क वेब की किसी वेबसाइट का यूआरएल होना चाहिए। क्योंकि इसकी कोई भी वेबसाइट आपको गूगल सर्च पर नहीं मिल सकती है। वैसे तो इसको यूएस नेवी आर्मी के लिए बनाया गया था लेकिन बाद में इस पर कई तरह के ढेरों अवैध धंधे शुरू हो गए। और आज के समय में इस पर नियंत्रण कर पाना बहुत मुश्किल हो गया है लेकिन फिर भी एजेंसियां इस पर काम कर रही हैं और बहुत सी वेबसाइट बंद भी कर चुकी हैं। 

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