आजकल लोगों को रात में निंद ना आने की शिकायत होने लगी है। बच्चों से लेकर जवानों तक को यही शिकायत है कि उनको रात में निंद ठीक से नहीं आती। दरअसल हमारे शरीर में प्राकृतिक अनुसूची प्रणाली है जो हमारे सोने से लेकर जागने तक के समय को नियंत्रित करती है। लेकिन आजकल मोबाइल फोन्स और लेपटॉप जैसे आधुनिक उपकरणों ने हमारे 'Natural clock system' को बिगाड़ दिया है। हमारे शरीर की खासियत यह है कि रोशनी में पाए जाने वाले विभिन्न रंगों के साथ अलग अलग प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। जैसे दिन ढलता है और रात होने लगती है तो सूरज की रोशनी हल्की और एम्बर हो जाती है जो और इससे हमारे शरीर में एक हार्मोन पैदा होता है जिसको मैलेटोनियन कहते हैं जो हमारे शरीर को संकेत देता है कि यह आराम करने और सोने का समय है। और वहीं जब सुबह निंद पूरी करके हम उठते हैं तो सूरज की रोशनी में ऐसे रंग पाए जाते हैं जिससे हमारे शरीर को संकेत मिलता है कि यह अभी काम करने और जागने का समय है। और इस प्रकार रोशनी को ब्लू लाईट कहते हैं। और इस प्रकार की रोशनी हमारे मोबाइल फोन, लेपटॉप और टीवी जैसे उपकरणों में भी पाई जाती हैं। और यही कारण है कि लोग रात रात भर मोबाइल फोन या लेपटॉप पर गुजार देते हैं और पूरी रात निंद नहीं आती। आजकल लोग मोबाइल फोन जैसे उपकरणों के बिल्कुल आदि हो गए हैं और कहीं भी इनका साथ नहीं छोड़ते यहां तक के बिस्तर पर सोने के समय में भी इसका इस्तेमाल करते हैं और जब सोने की कोशिश करते हैं तो निंद नहीं आती और फिर से फोन पर लग जाते हैं कि यह सोचते हुए कि कुछ समय बाद निंद आ जाएगी और इसी चक्कर में रात भर जाग जाते हैं। दरअसल मोबाइल फोन या लेपटॉप के डिस्प्ले में पाई जाने वाली ब्लू लाईट के कारण हमारे दिमाग को यह संकेत मिलता है कि अभी दिन है जिससे हमारा दिमाग शरीर के सभी आर्गन को सक्रिय रखता है जिससे हमारे शरीर को लगता है अभी सोने का समय नहीं है।
www.pcmag.comइलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ब्लू लाईट हो सकती है जानलेवा:
विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं की मानें तो ब्लू लाईट हमारे प्राकृतिक अनुसूची प्रणाली को खराब करती है जिससे हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता सकता है क्योंकि जब हम मोबाइल फोन की ब्लू लाईट के कारण हमारी निंद पूरी नहीं होगी और निंद की कमी के कारण हम डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। इससे हमारी मेमोरी कमजोर हो सकती है, सुस्ती हो सकती है, वजन बढ़ सकता है, शूगर लेवल बढ़ सकता है। और कुछ मामलों में कैंसर तक का भी खतरा हो सकता है।
ब्लू लाईट से कैसे सुरक्षित रखें खुद को?
मोबाइल फोन या लेपटॉप के डिस्प्ले से निकलने वाली ब्लू लाईट से बचने के लिए आप एंटी ब्लू लाईट चश्मे का प्रयोग करें खासकर जब आपको मोबाइल फोन या लेपटॉप को रात में इस्तेमाल करना हो।या तो आप ऐसे मोबाइल एप और साफ्टवेयर का प्रयोग कर सकते हैं जो ब्लू लाईट प्रतिरोधी होते हैं। ऐसे साफ्टवेयर्स की खासियत यह होती है कि यह मोबाइल फोन और लेपटाप के डिस्प्ले से ब्लू लाईट को हटा देते हैं। वैसे बेहतर यह होगा कि जब आप सोने जा रहे हों तो अपने मोबाइल फोन और लेपटाप को दूर रखें और अगर फिर भी निंद नहीं आने की शिकायत हो तो आप किताबें पढ़ें जिससे आपको अच्छी निंद आ सकती है। लेकिन अगर आपको जरूरी काम है तो आप एंटी ब्लू लाईट ग्लास का प्रयोग करें या एंटी ब्लू लाईट साफ्टवेयर्स का प्रयोग करें। जिससे आपको ब्लू लाईट से सुरक्षा मिल सकती है।

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