गाय, आस्था और धर्म

इसमें कोई संदेह नहीं है कि गाय हिन्दू धर्म में आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई है। और गाय को हिन्दू धर्म में मां का दर्जा दिया जाता है और उसका बहुत सम्मान और आदर किया जाता है। और सभी धर्मों के लिए जरूरी है कि वह किसी दूसरे धर्म की आस्था को ध्यान में रखते हुए वह भी गाय को उतना ही महत्व दे जितना हिन्दू धर्म में है। भारत एक ऐसा देश है जहां पर सभी प्रकार के लोग और अलग अलग धर्म और जाति सम्बन्ध रखने वाले लोग पाये जाते हैं। हर धर्म की अपनी अलग अलग आस्थाएं एवं विश्वास हैं। किसी धर्म अथवा जाति में मांस खाने को बहुत बुरा और अपनी आस्था के खिलाफ एंव एक पाप समझा जाता है तो किसी धर्म अथवा जाति में मांस खाने को बहुत पसंद किया जाता है। वैसे तो यह सभी को पता है कि करीब दुनिया सभी देशों में मांस खाया जाता है और इसको बहुत पसंद भी किया जा है। इसी तरह कुछ लोग मांस बहुत पसंद करते हैं और खुद को मांसाहारी कहते हैं तो कुछ लोग इसे पसंद नहीं करते तो खुद को शाकाहारी बतलाते हैं। वैसे यह बात तो छुपी हुई नहीं है कि जानवरों के मांस के साथ साथ उनके चमड़े से तरह तरह के सामान बनाए जाते हैं और इस पर कोई पाबंदी भी नहीं है। लेकिन भारत में माहौल ऐसा बना दिया गया है कि मांस को एक धर्म विशेष (मुस्लिम) से जोड़ दिया गया है जबकि भारत में मुस्लिम समुदाय के अलावा हिन्दू धर्म की बहुत सी जाति के लोग मांस खाते हैं और इसको बहुत पसंद भी करते हैं। और इसके अलावा अन्य धर्म के लोग भी मांस खाते हैं। लेकिन मुस्लिम समाज के लोगों को ही सिर्फ ऐसा दिखाया जाता है कि यह लोग सिर्फ मांस खाने के लिए ही पैदा हुए हैं और यह जानवरों के कातिल और हत्यारे हैं। जबकि मांस तो यूरोप और अमेरिका के देशों तक में बिना रोक के खाया जाता है। रही बात जानवरों को कत्ल करने की तो भारत उन देशों में से एक है जो भारी मात्रा में मांस एक्सपोर्ट करता है और एक्सपोर्ट करने वाली सारी कम्पनियाँ हिन्दू की हैं। अब आप खुद सोचें जानवरों का कातिल कौन है? भारत में गाय हत्या को लेकर कानून बनाये जा रहे हैं जिससे गायों को बचाया जा सके और इसके लिए अलग अलग कमेटी भी बनाई गई है। और यह बहुत ही अच्छी बात है कि हम खुद ही गायों की रक्षा के लिए कदम उठाएं लेकिन इस गाय की आड़ में एक घिनौनी राजनीति खेली जा रही है जिसकी बुनियाद धर्म और जातिवाद है। गाय को मुद्दा बना कर दो धर्मों को आपस में लड़ाने की राजनीति की जा रही है जिससे राजनेताओं की सत्ता बची रहेगी। एक मुस्लिम भाई ने गौ रक्षकों की हरकतों से परेशान होकर एक बात लिखी कि   'एक जानवर के जान की कीमत इन्सान की जान से अधिक हो गयी है' क्योंकि बहुत सी ऐसी घटनाएं घटी हैं बहुत से मुस्लिम युवकों को सिर्फ इस शक मे मार दिया गया कि उन्होंने गाय गाय तस्करी की है या गौ मांस खाया है। और इसी तरह कई हिन्दू भाईयों की भी इसी संदेह में पिटाई कर दी। उस मुस्लिम भाई के जवाब में हमारे एक हिन्दू भाई ने जवाब दिया कि ' कुरान मुल्लों की आस्था और विश्वास से जुड़ा है और अगर हम उसके किसी अक्षर और किसी पन्ने का अपमान और हटाने की मांग करें तो सारे मुल्ले इकठ्ठा हो कर मारने आ जाते हैं जबकि देखें तो वह सिर्फ एक काग़ज़ का पन्ना ही है फिर वह इन्सान की जान से ज्यादा किमती कैसे हो सकता है? तब तो तुम लोग कहते हो कि हमारी आस्था से जुड़ा है तो यही बात गाय के लिए क्यों समझ में नहीं आती? 
इसका जवाब मैं देता हूं........ 
क्या आपने कभी कुरान को देखा है? उसको किस तरह से मुस्लिम कवर्ड करके और कपड़े का गिलाफ बना कर ढक कर रखते हैं क्योंकि वह उनकी आस्था से जुड़ा है। 
और कभी आपने सडकों पर आवारा घूमती हुई गायों को देखा है? पहले खुद अपनी आस्थाओं का सम्मान करना सीखो जिस सम्मान करना आ गया तो गौ रक्षक जैसी कमेटियों की जरूरत नहीं पड़ेगी बाकी लोग खुद बखुद सम्मान करने लगेंगे। 

Post a Comment

0 Comments