राष्ट्रीयवाद और देशभक्ती के नारे लगाने वाली भाजपा। देशभक्त और देशद्रोह का प्रमाणपत्र बांटने वाली भाजपा। न्यायालय, संविधान, और लोकतंत्र पर विश्वास ना रखने वाली भाजपा। मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने वाली भाजपा। सन् 2014 में भ्रष्टाचार मंहगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों के साथ अच्छे दिन के नारे लगाते हुए सत्ता में आई। लोगों को 15-15 लाख के सपने दिखाए गए। काला धन लाने के लिए 100 दिन मांगे गए और फिर शायद सब जुमला बन कर रह गया। आज तो इस पार्टी को सत्ता में आए तीन साल हो गए हैं न काले धन का पता चला न भ्रष्टाचार खत्म हुआ न मंहगाई में कमी आई बल्कि पहले से कई गुना अधिक बढ़ गई है। लेकिन फिर भी कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचार कम हो गया है महंगाई कम और रोजगार ज्यादा हो गये हैं तो उन्हें सपने देखने की आदत हो गई है। और इससे किसी को कोई शिकायत भी नहीं होनी चाहिए हर किसी के अपने अपने विचार और ख्याल हैं और यह कोई बुरी बात भी नहीं है।
नोट बन्दी और काला धन:
कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि नोट बन्दी से काला धन निकल आएगा और भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म हो जाएगा तो ऐसे लोग अगर इस गलतफहमी से खुश हैं तो अच्छा ही है कम से कम थोड़ी सी खुशी तो मिली बाकी काले धन का तो पता नहीं। इसके लाभ तो सोच लिए और इससे होने वाले नुकसान की आपने परवाह तक नहीं की। इससे कितने आम लोगों का नुकसान हुआ यह कभी सोचा लोगो के व्यापार पर कितना असर पड़ा यह सोचा? कितने छोटे व्यापारी खत्म हो गए यह सोचा? इनकी भरपाई कौन करेगा? रुपये का मुल्य और कीमत में गिरावट आई यह कभी नहीं सोचा फिर इससे होने वाली मंहगाई के बारे में कुछ नहीं सोचा? सारा फैसला आपके हाथों में ही है हो सकता है आप उन छोटे कारोबारियों और उन आम लोगों को बेईमान घोषित करदें जो मामूली व्यवसाय से जुड़े हैं। यह भी हो सकता है कि यह ब्लॉग पढने के बाद मुझे ही बेईमान और काला धन जमा करने वाला साबित करने लगें लेकिन मैं यह बात साफ कर देना चाहता हूं कि मैं एक विद्यार्थी हूँ। मोदी जी ने कहा '' देश के करोड़ों लोग गोलियाँ खरीदने जा रहे हैं उनको गोलियां नहीं मिल रही हैं'' मुझ यह नहीं समझ में आ रहा है कि मोदी जी ने यह कैसे समझ लिया कि देश के करोड़ों लोग चोर हैं? देश की एक बड़ी जनसंख्या को आपने चोर कैसे मान लिया?
अचानक से देश की बड़ी (currency) बन्द होने से बैंकों में लाइनें लगना तो अनिवार्य है। और बड़ी (currency) होने के कारण रोजमर्रा जरूरतों को भी प्रभावित किया। लोगों को रसोई के सामान से इलाज के लिए दवाएं खरीदने तक में परेशानीयों का सामना करना पड़ा। इन्हीं कारणों के चलते बैंकों में लम्बे समय तक लाइनें लगी रहीं कुछ तो बिना इलाज के और कुछ बैंकों की लाइनों में खड़े खड़े मर गए। लेकिन मोदी की प्रशंसा करने वालों यह कहां दिखता? अजीब देशभक्ती है देश से प्रेम का दावा मगर देशवासियों से? शायद वो छोटे लोग रहे होंगे या चोर। यह तो सभी को पता है कि देश की करीब 70% जनसंख्या गांवों और पिछड़े क्षेत्रों में रहती है और उनमें बहुत से ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां बैंक का नामोनिशान नहीं है लेकिन फिर भी मोदी जी को ऐसा लग रहा है कि 2500 रुपये जो घण्टों लाइन में लगने के बाद मिले हैं उससे रोजमर्रा जरूरतों की भी पूर्ति होगी और बेहतर इलाज भी और उन क्षेत्रों को तो भूल ही जाओ जहां यह भी नहीं पहुंचा।
देशभक्ती और देशद्रोह:
देशभक्ती और देशद्रोह का पाठ तो बीजेपी से अच्छा आज तक किसी ने नहीं पढ़ाया होगा। और ना ही पढ़ा सकता है जो कोई भी बीजेपी या उसकी नीतियों की निन्दा करे वह देशद्रोह हो जाता है या अगर मुस्लिम समुदाय का है तो आतंकवादी और पाकिस्तानी हो जाता है जैसे कि बीजेपी के अलावा सारे संगठन और पार्टीयों पर देशद्रोही का ठप्पा लगा है और बीजेपी पर देशभक्ती का चाहे कारनामे कितने भी गन्दे हों अब चाहे वह आईएसआई की जासूसी हो या देह व्यापार का। इन सभी गन्दे कारनामों के पीछे कोई अच्छाई का पक्ष निकाला जाता है या फिर उसको किसी और संगठन से जोड़ दिया जाता है। जैसे अभी मंदसौर के किसानों पर गोलियां चलाने का मामला। पहले तो यह कहा गया कि कुछ हिंसक तत्व आंदोलन कर रहे हैं फिर मरने वालों किसानों के परिवारों को एक एक करोड़ रुपये का मुआवजा अब तो समझ में नहीं आ रहा है कि हिंसक तत्व थे तो मुआवजा और मदद क्यों? और अगर किसान थे हिंसक तत्व क्यों कहा? जब मामला नहीं संभल सका तो कह दिया गया कि कांग्रेस का हाथ है। मान भी लें अगर कांग्रेस का हाथ है और आपको पता भी है तो हाथ पे हाथ धरे क्यों बैठ गये? जनता किसी भी पार्टी को इसलिए चुनती है कि उन्हें बेहतर से बेहतर कानून व्यवस्था दे और आप यह कह के निकल रहे कि कांग्रेस ने भड़काया है तो आपने क्या किया?? किसानों पर गोलियां डालीं? अगर अब भी इनकी दाल ना गली तो शायद किसानों को देशद्रोही बना डालें और तमाम तरह के आरोप थोप दें।
लोकतंत्र को खतरा:
जिस तरह का माहौल बना दिया गया है इन बीजेपी वालों द्वारा कि अब हर कोई अपनी हक की आवाज उठाने से डरता है कि कहीं उस पर देशद्रोही और आतंकवादी होने का आरोप ना लगा दिया जाए। भारत के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि जनता की आवाज और उनके दर्द को डर में बदल कर चुप्पी साधने पर मजबूर कर दिया गया हो। किसी को बेरोजगारी से परेशानी तो चुप किसी को महंगाई से परेशानी तो चुप तरह तरह की परेशानीयों पर चुप्पी साधे रखने पर मजबूर कर दिया गया है। एक तरफ यह परेशानीयां तो दूसरी तरफ किसी अन्य पार्टी की प्रशंसा या किसी अन्य पार्टी के नेता की प्रशंसा भी देशद्रोह बना सकती है अभी जल्दी एक ऐसे भक्त से सामना हुआ मैंने पूछा कि क्या बीजेपी के अलावा किसी पार्टी को नहीं वोट कर नहीं कर सकते? तो कहने लगा कि नहीं सारी पार्टीयां चोर और गद्दार हैं। बहरहाल यह उनके अपने विचार हैं और हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन अगर हमारे विचार से बीजेपी चोर हो तो उनको भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन हमें तो तुरंत देशद्रोही का मेडल दे दिया जाता है। मैं उनसे विनती करना चाहूंगा कि आप लोग (Election commission of India) और न्यालय मे जाकर अपील करें कि बीजेपी के अलावा सारी पार्टियों की मान्यता खत्म कर दें। और तानाशाही (dictatorship) लाने की मांग करो। खत्म करदो (voting system) नहीं तो लोगों को पूरी आजादी से जीने दो जो उनका हक है एक लोकतांत्रिक देश में जीने का।
60 साल देश बेहाल:
एक अजीब बात यह भी कही जाती है कि पिछले 60 सालों से कांग्रेस ने देश को लूटा है। अगर कांग्रेस ने 60 सालों में सिर्फ़ देश को लूटने का ही काम किया होता तो आज मोदी जी विदेश दौरों पर ना दिख रहे होते और यह बात बोलने से पहले आज की देश की स्थिति और पिछली सरकार में देश की स्थिति और आर्थिक हालात की तुलना करलो आज की महंगाई की तुलना करो आज की बेरोजगारी की तुलना करो आज कानून व्यवस्था की तुलना करो। यह सोचते हुए कि कांग्रेस लूट रही थी और मोदी जी बचा रहे हैं और खुद फैसला करलो लूटने वाला अच्छा था या बचाने वाला? और अगर कांग्रेस देश को लूट रही थी तो लोगों ने आखिर क्यों कांग्रेस को ही चुना? और आज की मानसिकता के हिसाब से कांग्रेस देशविरोधी पार्टी है मुझे अफसोस है कि इतने सालों तक एक देशविरोधी पार्टी कांग्रेस सत्ता में रही और उसको सत्ता दिलाने वाली आम जनता थी तो मैं उनको क्या कहूँ देशद्रोही? जिन्होंने बार बार कांग्रेस को चुना? अगर उनको मैं देशद्रोही कह दूँ तो यह अन्याय होगा क्योंकि इन्हीं लोगों के कारण आज बीजेपी भी सत्ता में है। फिर से मैं भक्तों से विनती करना चाहूंगा कि लोगों के फैसले उनके उपर छोड दो वह खुद समझ लेंगे कि कौन उनके लिए अच्छा है और कौन बुरा। दूसरी बात मैं किसी पार्टी के पक्ष में नहीं हूं फिर यह सोचोगे कि बीजेपी की निन्दा और कांग्रेस की प्रशंसा क्यों? इसका आसान सा उत्तर है कांग्रेस से मै भी ऊब गया था लेकिन कांग्रेस और उसकी नीतियों और नेताओं के कारण जब हमे परेशानियों का सामना करना पड़ता तो हम गालियां और बुरा भला भी कह सकते थे लेकिन अब हमें लूट लिया जाए और हम शिकायत तक नहीं कर सकते।
कुछ अपने बारे में:
यह आर्टिकल पढ़ने के बाद दिल में बेचैनी होगी कि आखिर लिखने वाला कौन है? किस धर्म का है क्योंकि भक्त धर्म ढूंढने में माहिर हैं।
मेरा नाम मुजफ्फर सादिक है मैं एक भारतीय मुस्लिम हूं और मुझे गर्व है भारतीय होने पर और आप से अनुरोध करता हूँ कि कृपा करके मुझे पाकिस्तान जाने को मत कहना मैंने यही जन्म लिया है और यही मरना भी है यह भारत की धरती किसी के बाप की नहीं पाकिस्तान जाने को उससे कहो जो नवाज शरीफ के साथ केक खाता है और देशद्रोही कहने कि तो हिम्मत भी मत करना यह फैसला न्यायालय पर छोड़ दो।
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