सुलतान महमुद ग़ज़नवी ने सोमनाथ पर हमला क्युं किया था...?


सुलतान महमुद ग़ज़नवी ने सोमनाथ पर हमला क्युं किया था...? पढें इतिहास के पन्नों से
सम्भवत: भारत की ओर मुस्लिम सेना लाने वालों मे हमारे हिन्दू भाई सबसे ज्यादा नफरत महमूद गजनवी से करते होंगे ये सोचकर कि महमूद ने हिन्दू धर्म के विनाश के लिए एक दो नहीं बल्कि 17 बार सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण किए……..
लेकिन भाईयों किसी भारतीय या अफगानी स्रोत मे महमूद द्वारा सत्रह आक्रमण की बात नहीं मिलती, 17 आक्रमणो की बात एक पश्चिमी इतिहासकार “हेनरी इलियट” ने बताई थी … ये बात हेनरी ने किस दैवीय स्रोत से पता लगाई, ये तो स्पष्ट नहीं, …….खैर आप गजनवी के सत्रह ही आक्रमण मान लो..
लेकिन इस बात पर भी विचार करने की कोशिश करो कि ये आक्रमण क्यों हुए ??
महमूद गजनवी ने न तो धन लूटने के लिए सोमनाथ पर हमले किए और न हिन्दू धर्म के द्वेष मे मन्दिर तोड़ने के लिए
क्योंकि यदि महमूद का उद्देश्य धन ही लूटना होता, तो भारत का सारा धन केवल सोमनाथ के मन्दिर मे ही तो नहीं भरा था, जो महमूद ने केवल सोमनाथ पर हमले किए , भारत के सारे राजे महाराजाओं और धनिकों के घरों और भारत के अन्य समृद्ध मन्दिरों को छोड़कर ??
और यदि महमूद को मूर्ति या हिंदू मन्दिरो से कोई शत्रुता होती तो गजनी से लेकर भारत तक उसके मार्ग मे पड़ने वाले मन्दिरों को महमूद ने हाथ तक क्यों न लगाया ????
स्पष्ट है कि महमूद गजनवी ने किसी अज्ञात विशेष कारण से केवल और केवल एक मन्दिर “सोमनाथ” पर आक्रमण किए वो भी बार बार
दरअसल अरब मे इस्लाम आने से पहले मूर्तिपूजा का चलन था और अरब मे जिन मूर्तियों को सबसे ज्यादा पूजा जाता था उनमें से एक का नाम “मनात” था ॥ इन मूर्तिपूजक लोगों ने बहुत ही हिंसक और अश्लील रीति रिवाजो को धर्मसम्मत बना रखा था , जैसे ये लोग बेटियों को पैदा होते ही दफ्ना देते, और उसे ईश्वर द्वारा दण्डनीय पाप नहीं समझते थे, ये लोग स्त्रियों से वेश्यावृत्ति कराते, ये लोग संतानोत्पत्ति के लिए एक औरत का अनेक पुरूषों के साथ एक ही समय मे सहवास कराते , और भी बहुत से बेशर्मी के काम करते
लेकिन जब अरब मे इस्लाम आया तो ये गलत रिवाज खत्म कर दिए गए और “लात”, “मनात”, हुबल” और “उज्जा” जैसी मूर्तियों को ध्वस्त कर दिया गया व इनकी पूजा बन्द हो गई
1001 ईस्वी के आसपास गजनी के सुल्तान महमूद ने जब जयपाल से प्रतिशोध लेने के लिए भारत का रूख किया तो उसे यहां ठीक प्री इस्लामिक अरब जैसे ही हिंसक और अश्लील रिवाजो का प्रभाव देखने को मिला साथ ही महमूद को भारत मे स्थित सोमनाथ मन्दिर के प्रभाव की सूचना मिली …. “सोमनाथ” के नाम का पिछला भाग “मनात” के समान होने के कारण महमूद गजनवी ने समझा कि ये उसी प्री इस्लामिक अरबी धर्म का देवता मनात है जिस धर्म के कारण अरब मे अन्याय और अश्लीलता से भरे रिवाज़ फैले थे, और इसी मनात के कारण भारत मे ये गंदे रिवाज फैले हैं
तिसपर सोमनाथ मन्दिर मे 500 देवदासियों के होने की सूचना मिलती है [ प्राचीन भारत का इतिहास एवं संस्कृति , के सी श्रीवास्तव, प. 183 ]
इन सब जानकारियों का महमूद ने यही निष्कर्ष निकाला कि मनात के बुत को तोड़ दिया जाए ताकि जिस तरह अरब मे मनात आदि की मूर्तियां तोड़े जाने के साथ ही अरब के सारे पुराने अश्लील और हिंसक रिवाज जो अरब वासियों के पुराने धर्म मे चलन मे थे, खत्म हो गए थे उसी तरह भारत मे भी खत्म हो जाएं ( फरिश्ता के अनुसार गजनवी ने भारत मे उसी मनात का बुत तोड़ा था, जिसकी पूजा अरब मे हुआ करती थी )
इस प्रकार हम देखें, तो न महमूद को भारतीय मन्दिरो से कोई द्वेष था न भारत वासियों से … बल्कि महमूद ने तो सोमनाथ को एक अरब देवता की मूर्ति समझकर तोड़ा था ताकि भारतीय स्त्रियों के सम्मान, और बच्चियों की जान की रक्षा हो सके ….
तो ये तो अबलाओं की भलाई मे ही उठाया गया कदम था, न कि हिन्दू धर्म पर आक्रमण … याद रखिए, यदि ये हिन्दू धर्म पर आक्रमण होता, तो केवल सोमनाथ मन्दिर तक सीमित न रहता
लेकिन देखिए, यही महमूद जब मथुरा पहुंचे तो वहाँ के मन्दिरो को महमूद ने बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाया ( मथुरा मे आज तक 1600 वर्ष और उससे भी पुरानी हिन्दू और बौद्ध मूर्तियां साबुत रखी हैं )
बल्कि इन मन्दिरो की कारीगरी से से प्रभावित होकर सुल्तान भारतीय शिल्पियों को अपने साथ गजनी ले गए और वहां उन शिल्पकारों से सुन्दर सुन्दर भवन और मस्जिदों का निर्माण कराया और महमूद ने अपने सिक्के पर इन भारतीय शिल्पियों से संस्कृत मे कलिमा “अव्यक्त मेकं मुहम्मद अवतार” खुदवाया था [ राधाकृष्ण चौधरी, प्राचीन भारत का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास , प. 384]
और साथ ही महमूद गजनवी ने अपनी सेना मे बड़ी संख्या मे हिन्दुओं को शामिल किया था (Madhya kaleen Bharat-I, Harishchandr Varma, P.105 ), उनका धर्म परिवर्तन नहीं किया था ….
गौर करते रहिये…. सुल्तान महमूद के हिंदू द्वे

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