गोरखपुर अस्पताल कांड का असली दोषी कौन?

गोरखपुर के सरकारी अस्पताल बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त को आक्सीजन न मिलने के कारण कुछ बच्चों की मौत हो गई और देखते ही देखते देखते 48 घंटे के भीतर 60 आक्सीजन न होने के कारण दम तोड़ गए इस पर न तो अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया हुई न तो सरकार की तरफ से जैसी ही यह खबर चर्चित हुई तो फिर तो सारे टेलीविजन न्यूज चैनल से लेकर अखबार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक ने इस मामले को फैलाना शुरू कर दिया जैसे ही यह खबर आम हुई सरकार से लेकर विपक्ष तक में खलबली मच गई। एक तरफ सरकार अपनी सफाई देने में जुट गई तो दूसरी ओर विपक्ष निन्दा करते न थकता इधर इनमें खलबली तो उधर मिडिया अपना काम कर रही कोई कुछ कवरेज दिखा रहा तो कोई कुछ। लेकिन खैर इसी मिडिया के कारण सोई हुई सरकार जाग तो गई आश्चर्य तो इस बात का है की इतने संवेदनशील राज्य के मुख्यमंत्री जो जानवरों तक की सुरक्षा का ख्याल रखते हैं उनको इन्सानों के बच्चे से कोई हमदर्दी नहीं? आश्चर्य इस बात का है कि इतने संवेदनशील हमारे देश के प्रधानमंत्री जो अमिताभ बच्चन के छींक आने पर ट्वीट करके हाल पूछते हैं इन मासूमों की मौत पर मौन क्यों?
असली दोषी कौन?
सबसे ज्यादा अहम बात यह है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? किसकी कोताही से मासूमों की जान गई? जब तक हमें इसका पता ना हो तब तक सुधार करना नामुमकिन है। अलग अलग मिडिया चैनलों इस न्यूज को अलग अलग तरह से दिखाया किसी ने अपनी पड़ताल में अस्पताल प्रशासन को दोष दिया किसी ने सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कुछ ने इसमें सभी को निर्दोष बताया।
अगर हम यह मान लें कि इसमें पूरा दूष अस्पताल प्रशासन का है तो भी यह सरकार सवाल के घेरे में आएगी। कीछ लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन पहले से भ्रष्ट था और धड़ल्ले कमीशन खोरी हो रही थी और जब से बीजेपी सत्ता में आई तब से उनकी कमीशनखोरी बंद हो गई। और कमीशन ना मिलने से कंपनी ने आक्सीजन नहीं दिया। बहरहाल मामला जो भी हो लेकिन जिस प्रकार ने बीजेपी ने शोर मचाया था कि भ्रष्टाचार खत्म कर देंगे बेईमानों को नहीं छोड़ा जाएगा फिर अगर आप यह बात करते हैं कि अस्पताल प्रशासन भ्रष्ट था। तो सरकार आपकी थी और आपको और आप इन्हें पाल रहे थे तो इसके जिम्मेदार भी आप ही हुए। और जो लोग कहते हैं कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं तो उनका कोई दुख नहीं होना चाहिए? मरने देना चाहिए? क्योंकि अगस्त है। ऐसा बोलने वालों को थोड़ी शर्म बची हो तो डूब मरो। और दूसरी बात अगर अगस्त में बच्चे मरते हैं तो फिर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को सस्पेंड क्यों किया? अगस्त लाने में तो उसका कोई हाथ नहीं! जबकि प्रिंसिपल ने तो सुबूत तक पेश किए अपने निर्दोष होने का लेकिन शायद उनकी बात सच थी कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए उनको सस्पेंड किया गया नहीं तो नाम बड़े बड़ों के आते और खतरा शायद कुर्सी तक को हो जाता। मगर मामले को दबाने के लिए न तो मृतक के परिजनों को मिलने दिया गया और न तो पोस्टमार्टम किया गया और आंकड़ों को छुपाने के लिए फोर्स तैनात कि गई जिससे ना तो कोई अन्दर आ सकता है और ना खबर बाहर आए।
भक्त क्या कहते हैं?
कुछ लोगों को भक्ति का भूत सवार है चाहे सरकार की गलत नीतियों के कारण कितने भी बुरे हालात हो जाएं चाहे कितने निर्दोष मारे जाएं चाहे कितने किसानों के सीनो पर गोलियां चलें चाहे भ्रष्टाचार और महंगाई आसमान छू जाए यह एक ही राग अलापते रहते हैं मोदी भक्ति भाजपा भक्ति इस प्रकार के जितने कांड होते हैं उनका जिम्मा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को देते हैं। समझ ना आने वाली सबसे बड़ी बात तो यह है कि अब तक जितने भी कांड हुए हैं सब कांग्रेसी और समाजवादीयों ने कराया है तो अगर सारे कांड कांग्रेसी और समाजवादी सत्ता में ना होते हुए कर रहे हैं तो आप क्या कर रहे हैं? आपने तो बड़े बड़े दावे कर रखे हैं कि भाजपा सरकार आते ही गुंडे चौबीस घंटे के अन्दर प्रदेश छोड़ कर भाग जाएंगे यह चौबीस घंटे कब होंगे? और यह बहाने कब तक चलेंगे कि कांग्रेस का हाथ है? आप सत्ता में हैं और अब तक हाथ कांग्रेस ओर समाजवादी का चल रहा है तो आप क्या करने के लिए सत्ता में हैं। सिर्फ यह गाना सुनाने के लिए कि फलां स्थान पर 5 लोग मारे गए और इसमें कांग्रेस का हाथ है। बसससससससस

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