समय के साथ अब इनसान भी बदल रहा है और उसकी सोच में भी काफी बदलाव आ रहा है। पहले लोग यह सोचा करते थे कि अगर बच्चे को सही रास्ते पर लाना हो या उसे सुधारना हो तो उसके लिए दण्ड जरुरी है। और बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए और प्रशिक्षण करने के लिए उनको दण्ड दिया जाता था। यह केवल घरों तक सिमित नहीं था बल्कि अगर बच्चा स्कूल में भी अगर पढ़ाई में कमजोर होता या पढने में मन नहीं लगाता या फिर स्कूल के दिये गये काम को पूरा नहीं करता था तो उसे दण्डित किया जाता था। दण्ड के रूप में उसे न्यूड परेड से लेकर पिटाई तक को सहन करना पड़ता था। लेकिन अब समय बदल गया है इस प्रकार का सिद्धांत और इस प्रकार की सोच आज समय में पूरी तरह से गलत मानी जा रही है।मनोवैज्ञानिकों ने इसको पूरी तरह से गलत ठहराया है और इस बात को सिद्ध किया है कि बच्चों को इस तरह के दण्ड देने से इसका उनपर उल्टा असर होगा और इसके कारण बच्चे सुधरने के बजाए और बिगड़ सकते हैं। और भी बहुत से बुरे प्रभाव च्चों में देखने को मिल सकते हैं। इसी प्रकार अगर स्कूल में उसे पढ़ाई के लिए दण्डित किया जाता है और उसे मारा पीटा जाता है तो उसे पढ़ाई में दिलचस्पी कम होने लगेगी और बच्चा पढ़ाई से डरने लगेगा। इस तरह से वह पढ़ाई से दूर होता चला जाएगा।
फिर बच्चों को प्रशिक्षित कैसे करें?
बेशक बच्चों को प्रशिक्षित करना और उनको अच्छा, बुरा और सही और गलत चीजों की पहचान कराना बहुत जरूरी है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हम उसकी गलतियों के लिए उसको मारने लग जाएं। इससे बच्चे में आपको लेकर सिर्फ नफरत पैदा होगी और बच्चा सुधरने के बजाए और बिगड़ सकता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा बुरी चीजों से दूर रहे तो आप उसको मारने के बजाय आप उसके दिल में बुरी चीजों के लेकर डर और नफरत पैदा करें जिससे आपका बच्चा बुराईयों से दूर रहने लगेगा। आप उसे गलत और बुरी चीजों से डराएं और यह उस पर बहुत ज्यादा असर करेगा।
और इसी तरह अगर बच्चा पढ़ाई में कोताही करता हो तो शिक्षक उसको मार या पीट कर खुद को उसका दुश्मन ना बनाए बल्कि उसका दोस्त बनकर उसकी परेशानी को समझे और उसकी पूरी मदद करे। नहीं तो बच्चा पढ़ाई से डरने लगेगा और उससे दूर भागना चाहेगा।
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आज पूरी दुनिया में बाल शोषण रोकने के लिए क्रांति फैली हुई है। और इस क्रांति ने भारत में भी अपने कदम रख दिये हैं। भारत में अभी भी कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों को गलतियों पर दण्डित किया जाता है। आज हमें आवश्यकता है कि ऐसे क्रूर दंड को रोका जाए जिससे बाल अत्याचार के बढ़ने का खतरा है। लगभग दुनिया भर के देशों में स्कूलों से इस प्रकार के मानक दंडों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जो बाल शोषण को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार के क्रूर दंड के कारण बहुत से बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। इसलिए इस प्रकार की प्रथा जो भारत में पुराने समय से चलती आ रही है अब इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

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