अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों को मिले जीवन के साक्ष्य

अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों को ऐसी गुफाएं मिलीं हैं जिसका तापमान 25 तक डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। और इस तरह के वातावरण में जीवन का होना पूरी तरह से संभव है।

हम सभी को यह पता है कि अंटार्कटिका 98% बर्फ की चादरों से ढंका हुआ है और वहां का औसत तापमान - 10 डिग्री सेल्सियस से - 35 डिग्री सेल्सियस तक होता है। और ऐसे अत्यधिक ठंडे मौसम की स्थितियों में जीवन को बनाए और बचाए रख पाना बेहद मुश्किल है। अभी हाल ही में यह पता चला है कि अंटार्कटिका की बर्फीली चादरों के नीचे जीवन संभव है। शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका की उन बर्फ की चादरों के नीचे उपस्थित एक गर्म और संभावित रहने के लायक नखलिस्तान की खोज की है।
ईरेबस पर्वत के पास स्थित एक ज्वालामुखी ने बर्फ की गुफाओं का खोखला तंत्र बनाया है जहां तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। अंटार्कटिका की अत्यधिक ठंडी और ज्वालामुखी की अत्यधिक गरम स्थितियों के मिश्रण से शायद गुफाओं के अन्दर इतना आरामदायक और सुखदायक वातावरण है।
लीड रिसर्चर Ceridwen Fraser ने अपने सहयोगियों के साथ आस्ट्रेलिया नेशनल यूनिवर्सिटी से जब इस गरम गुफा के बारे में अध्ययन करने के लिए आईं तो जब वह गुफा के अन्दर की मिट्टी का फोरेंसिक अध्ययन करने में लगीं हुईं थीं तो उनको वहां कुछ चौंका देने वाले विवरण मिले। उन्हें वहां शैवाल और कीचड़ से छोटे जानवरों के डीएनए के निशान मिले। हालांकि उस समय उस गुफा में उनको न तो कोई जानवर मिला और न ही कोई पौधा दिखाई दिया। लेकिन कई शोधकर्ताओं का मानना है कि उन गुफाओं में गरम परिस्थितियां कई पौधों और जानवरों की प्रजातियों को रहने योग्य बना सकती हैं। और ऐसी भी संभावना है कि जानवरों की कुछ नई किस्म की प्रजातियां भी उन गरम गुफाओं के अंदर रह सकती हैं।
फ्रेजर का कहना है कि इस गुफा में पाया गया एक डीएनए अनुक्रम आर्थ्रोपोड्स (Arthropods) के बहुत ही समान था जो यह इंगित करता है कि मकड़ी या घुन जैसे कीड़े यहां मौजूद थे।
माइने यूनिवर्सिटी के एक टीम मेम्बर, प्रोफेसर लॉरी कॉनेल ने भी आगाह किया है कि यह खोज अत्यंत रोमांचक है, किन्तु अज्ञात डीएनए के निशान पाए जाने का यह मतलब नहीं है कि जानवर अभी भी उस गुफा में रह रहे हैं। जैसा कि तेज हवाएं अंटार्कटिका में बहती हैं इससे यह भी हो सकता है कि हवा का बहाव उन जानवरों को यहाँ उड़ा कर लाया हो। इसलिए यह आवश्यक है कि इन खोजों के बारे में तेजी से शोध किया जाना चाहिए और अंटार्कटिका की अधिक से अधिक जगहों के बारे में पता लगाना चाहिए ताकि अंटार्कटिका के बर्फ़ के नीचे जीवन होने की संभावना के बारे में कुछ ठोस सबूत मिल सके। यह शोध अध्ययन हाल ही में एक पत्रिका पोलर बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ था।

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