अरलिंगटन में टेक्सस विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम के वैज्ञानिक ज़ूई पैन ने पाया है कि, ज़िंक कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को चुनौतीपूर्ण रूप से रोक देता है, लेकिन सामान्य एसोफेजीयल इपिथीलियल कोशिकाओं को नहीं।
राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार एसोफेजीयल (Esophageal) कैंसर दुनिया भर में मानव कैंसर द्वारा मृत्यु का छटा प्रमुख कारण है।
डॉक्टर पैन ने कहा है कि "हमारा अध्ययन ऐसोफेजीयल कैंसर के रोकथाम और उपचार के लिए एक बेहतर मार्ग प्रदान कर सकता है"।
पिछले अध्ययनों से पता चला था कि ज़िंक मानव स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, और कैंसर से अन्नप्रणाली की सुरक्षा करता है। हालांकि यह पूरी तरह समझा नहीं गया कि ज़िंक में अन्नप्रणाली को कैंसर से बचाए रखने की क्षमता क्यों है?
डॉक्टर पैन ने कहा कि" कई कैंसर रोगियों में ज़िंक की कमी पाई गई है। दोनों नैदानिक आंकड़ों और पशु अध्ययनों से पता चला है कि यह खनिज समग्र शरीर के स्वास्थ्य और कैंसर की रोकथाम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ज़िंक कई प्रोटीन और कई एंजाइमों में एक महत्वपूर्ण तत्व है और ज़िंक का अभाव कोशिकाओं को कार्य करने के लिए असंभव बनाता है।
लेकिन पहले हमें यह नहीं पता था कि क्यों ज़िंक की एक ही शारीरिक सांद्रता कैंसर कोशिका की वृद्धि को रोकती है, जबकि सामान्य कोशिकाओं को नहीं।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि "हमारे अध्ययन में, हमारे ज्ञान के लिए पहली बार पता चलता है कि ज़िंक कैंसर कोशिकाओं में अस्थिर कैल्शियम सिग्नल में बाधा उत्पन्न करता है, जो कि सामान्य कोशिकाओं में अनुपस्थित हैं। और इस तरह ज़िंक कैंसर कोशिका (सेल) की वृद्धि को रोकता है।
" अब यह प्रतीत होता है कि ज़िंक और कैल्शियम में एक क्रॉस टॉक हो सकता है, जिसका अर्थ यह है कि उन्हें जोड़ा जा सकता है"।
ज़िंक की एक अपर्याप्त मात्रा कैंसर और अन्य बीमारियों के विकास का कारण बन सकती है।
डॉक्टर पैन ने कहा कि "यही कारण है कि अच्छे आहार का होना जरूरी है"।
ज़िंक समृद्ध पदार्थो में जैसे पालक, सन बीज, गौमांस, कद्दू के बीज और समुद्री भोजन जैसे झींगा और कस्तूरी में पाया जाता है।


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