किसी भी विकसित देश के विकसित होने की सबसे बड़ी वजह उस देश के लोग, और उनकी सोच होती है, जो उनके देश को आगे ले जाती है। यह देश की जनता ही होती है जो देश में बदलाव और तरक्की लाती है, क्योंकि उनकी सोच प्रगतिशील होती है, जो हमेशा आगे बढ़ते रहने के बारे में सोचती है। और तरक्की में आने वाली रुकावटों को कैसे दूर किया जाए उसके बारे में भी सोचा जाता है। जहां दुनियां एक के बाद एक विकास की सीढ़ियाँ चढ़ रही है, वहीं भारत गाय, गोबर, मंदिर, मस्जिद में लगा हुआ है। और लोग धर्म के चक्कर में ऐसे उलझा दिये गये हैं, कि देश में अराजकता और अशांति का माहौल बन गया है। इसके अलावा भारत में लोगों की सोच अपने स्तर से इतनी गिर गई है कि अगर ऐसा चलता रहा तो भारत में विकास नाम की कोई चीज़ नहीं बचेगी। ऐसी सोच से बहुत से कारण पैदा हो गए हैं जो कभी भारत को विकसित नहीं होने देंगे।
सरकार की हर परिस्थिति में प्रशंसा
भारत में ऐसा माहौल बन चुका है कि कुछ लोग सरकार के हर फैसले की बिना सोचे समझे प्रशंसा करने में लगे रहते हैं। और सामने होने वाली खराबियों और गड़बड़ियों को भी अच्छा कहने लगते हैं। मतलब भारत एकमात्र ऐसा देश बन चुका है कि जहां नेताओं को पूरी आजादी मिलती है कि जो मर्जी वह करें, और ऐसा केवल इसलिए होता है क्योंकि उनको ऐसे लोगों के समर्थन से साहस मिलता है, जो उनके हर अच्छे, बुरे फैसलों, नीतियों और कामों की प्रशंसा करते हैं। हद तो यह है कि कभी कभी तो खुद सरकार को भी अपने लिए गए फैसले में गलती नजर आने लगती है, और उनमें बदलाव भी किये जाने लगते हैं, लेकिन उसी गलती की प्रशंसा बहुत से लोग कर चुके होते हैं।
मुस्लिम राष्ट्र बनने की गलतफहमी
सत्ता पाने और सत्ता में बने रहने के लिए तरह तरह के हथकंडे आजमाए जाते हैं। और सबसे बड़ा हथकंडा है वोट बैंक, वोट बैंक दरअसल किसी एक खास जाति, धर्म या समुदाय को खुश करके या बहका करके पूरा वोट अपनी झोली में डाल लेना इसको वोट बैंक कहते हैं। और यह राजनीति का सबसे अहम दाव है। आजकल राजनीति में एक बड़ा दाव आ गया है और यह दाव धर्म के नाम पर खेला जाता है। वर्तमान में बहुसंख्यक यानी हिन्दूओं के दिमाग में ऐसी बातें डाली जा रही हैं कि अगर भारत में मुसलमानों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भारत मुस्लिम राष्ट्रीय बन जाएगा और भारत 'जो की हिन्दूओं का देश है ' इसमें हिन्दू चैन से नहीं रह पाएंगे और मुसलमानों के गुलाम बन जाएंगे, इसलिए भारत को मुस्लिम राष्ट्रीय बनने से रोकने के लिए यहां एक हिंदू शासन होना जरूरी है, जो मुसलमानों पर काबू पा सके। ऐसी भ्रांतियां पैदा करने वाले लोग खुद को हिन्दू धर्म के सबसे बड़ा प्रतिनिधि भी बताते हैं। और हिन्दूओं का सबसे बड़ा सुख चिंतक भी जताते हैं, ताकि हिन्दूओं की सहानुभू मिल सके और उनके वोट बटोर सकें। तो अगर लोग इनकी बातों में आकर इस प्रकार की भ्रांतियां अपने दिमाग में पालेंगे तो इससे केवल राजनीतिक पार्टियों का फायदा होगा देश का नहीं। और देश में केवल नफरत ही फैलेगी।
महंगाई बढ़ने पर खुशी
भारत में बड़े अजीबोगरीब तरह के लोग पनपने लगे हैं, जो महंगाई बढ़ने को देश के आर्थिक विकास से जोड़ते हैं। उनको लगता है कि महंगाई बढ़ने से देश में तरक्की होगी, न जाने इस प्रकार की सोच कहाँ से आती है उनके दिमाग में। जबकि महंगाई का बढ़ना देश की बुरी आर्थिक स्थिति का जीता जागता सुबूत है। इससे देश की मुद्रा का मूल्य और महत्व भी घटता है। यानी अपने पैसे की वैल्यू कम हो जाती है। लेकिन यह बात बहुत से लोगों को समझ में नहीं आती। और वह समझते हैं कि महंगाई बढ़ने से देश विकसित हो रहा है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां महंगाई बढ़ने पर लोग खुश होते हैं।
कारोबार ठप होने पर खुश होना
नोटबंदी के बाद जीएसटी जिसके कारण व्यापारियों की बुरी दुर्दशा हुई, फिर भी कुछ लोग खुश होते रहे कि अपने देश के व्यापारी और व्यापार बर्बाद हो रहे हैं। और हद तो यह है कि इनको चोर भी कहा जाने लगा, अब ना जाने ऐसे लोग चाहते क्या हैं? शायद वह चाहते हैं कि पूरा भारत बेरोजगार हो और महंगाई चरम सीमा पर हो। और ना जाने यह लोग भारतीयों को बाहर नौकरी करते देख कैसे खुश होते हैं? लेकिन ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि भारत की अर्थव्यवस्था में इन व्यापारियों का भी बहुत योगदान और सहयोग होता है। और जहां तक उद्योगपतियों की बात है तो उन पर अरबों का रुपए भारतीय बैंकों का कर्जा है।
ज्यादा टैक्स भरने पर खुश होना
भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां की सरकार सबसे ज्यादा टैक्स वसूलती है, और टैक्स के ज्यादा होने का यह मतलब नहीं है कि यह पैसे सरकार के पास जाते ही देश बदलने लगेगा, अगर ऐसा होता तो कोई देश पीछे नहीं होता। और एक बात समझ लेनी चाहिए कि जितना ज्यादा टैक्स वसूला जाएगा उतनी ज्यादा ही महंगाई बढ़ेगी। इसके अन्य दुष्प्रभाव यह भी हो सकते हैं, कि ज्यादा टैक्स भरने के कारण जो कंपनी पहले टैक्स भरने के लायक थी वह बर्बाद होने के कारण टैक्स भरने लायक ही ना रहे। जीएसटी की बहुत से लोग तारीफ करते नहीं थके लेकिन जीएसटी में बुराई तो खुद सरकार ने भी दिख गई है।
बेरोजगारी पर खुश होना
भारत में लोग इस बात पर भी खुश होते हैं, कि सरकार बदलने से बहुत से लोगों की रोजी रोटी छिन गई है। ना जाने यह खुश होने का कौनसा कारण है? कुछ लोगों को लगता है बहुत से लोगों में वह युक्ति नहीं थी जिन पद पर सरकार ने उनकी नियुक्ति की थी। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि कारोबार छीनने के बजाय सरकार को लोगों को उनकी प्रतिभा, योग्यता के आधार पर उन्हें रोजगार देना चाहिए। अब ऐसा तो हो नहीं सकता कि भारत में लोग प्रतिभाहीन, गुणहीन, योग्यताहीन, कौशलहीन पैदा हुए हैं। और अगर ऐसा है तो फिर वह लोग जिनको भारत में रोजगार नहीं मिलता वह विदेशों में नौकरियां कैसे कर रहे होते हैं?
भारत से जब तक यह सब खत्म नहीं होता तबतक भारत में विकास होना असंभव है।
यह भी पढ़ें!
अॉनलाइन शॉपिंग फ्रॉड से कैसे बचें?
भारत से जब तक यह सब खत्म नहीं होता तबतक भारत में विकास होना असंभव है।
यह भी पढ़ें!
अॉनलाइन शॉपिंग फ्रॉड से कैसे बचें?

0 Comments