नेचर इम्यूनोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार चूहों में जो एंटीबॉडी डेंगू वायरस के विरुद्ध रक्षा करता है वह ज़ीका वायरस के विरुद्ध भी प्रभावी होता है।
ज़ीका विषाणु की डिजिटल रूप से रंगी गई संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्म(TEM) छवि।
वाशिंग्टन विश्वविद्यालय के स्कूल अॉफ मेडिसिन के वरिष्ठ लेखक और प्रोफेसर ने बबताया कि। एंटीबॉडीज कई हफ्तों तक रक्तप्रवाह में रहते हैं इसलिए एक या कुछ खुराक एंटीबॉडी - आधारित दवा एक गर्भवती महिला को दिया गया।संभावित रूप में यह एंटीबॉडी ज़ीका से उसके भ्रूण की रक्षा कर सकने में समर्थ रहे। और साथ ही साथ इस एंटीबॉडी से एक और लाभ यह जुड़ता है कि यह ज़ीका और डेंगू के रोग उस गर्भवती महिला को बचाता है।
डेंगू के कारण तेज बुखार होता है, और गंभीर सर दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में भी दर्द होता है। ऐसा बच्चों और वयस्कों दोनों में होता है। लेकिन डेंगू सीधे तौर पर भ्रूण को नुकसान नहीं पहुँचाता है।
शशोधकर्ताओं ने पाया है कि ईडीई1-बी10 (EDE1-B10) नामक एक एंटीबॉडी न केवल डेंगू के वायरस को बेअसर (Neutralize) करता है बल्कि चूहों में ज़ीका रोग से ववयस्कों और भ्रूणों को भी बचाता है।
चूंकि डेंगू और ज़ीका वायरस एक दूसरे से संबंधित हैं, प्रोफेसर डायमंड और उनके सह-लेखक ने तर्क दिया है कि डेंगू रोग से बचाने वाला एंटीबॉडी ज़ीका पर भी वैसे ही काम कर सकता है।
उन्होंने ने गैर-गर्भवती वयस्क चूहों को ज़ीका वायरस से संक्रमित किया और फिर ईडीई1-बी10 एंटीबॉडी संक्रमण के तीन या पांच दिनों बाद दिया, दूसरे अन्य समूह के चूहों की तुलना में जिनको ज़ीका वायरस से संक्रमित किया गया था और फिर उनको ईडीई1-बी10 न देकर कूटभेषज दिया गया, ससंक्रमण के तीन हफ्तों के भीतर, अनुपचारित चूहों में 80% से अधिक की मृत्यु हो गई। जबकि संक्रमण के तीन दिनों के भीतर ईडीई1-बी10 प्राप्त सभी चूहे अभी भी जीवित थे। और वह चूहे भी जीवित थे जिन्होंने संक्रमण होने के पांच दिन बाद एंटीबॉडी प्राप्त की थी।



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