बैक्टीरिया और वायरस में अन्तर

जीवाणु (बैक्टीरिया) विषाणु (वायरस) से कैसे अलग है? 
बैक्टीरिया अकेले ऐसे हैं जिनको प्रोकैर्योटिक सूक्ष्मजीव कहे जाते हैं। जो विभिन्न प्रकार के वातावरण में रहते हैं , अत्यधिक सर्दी और गर्मी की स्थिति या किसी जीव के अंदर भी रहते हैं। 
वायरस बाध्यकारी अन्त:कोशिक परजीवी होते हैं जिनके लिये जीवित हॉस्ट अपने अस्तित्व के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन वायरस के जीवित या अजीवित होने की स्थिति पर अभी भी बहस जजारी है। 
निस्संदेह, वायरस को जीवन के कुछ गुणों का प्रदर्शन करने वाले उप-कोशीय कणों के रूप में माना जाता सकता है। 

बैक्टीरिया : बैक्टीरिया को विभिन्न आकृतियों और आकारों में पाया जा सकता है। सामान्य बैक्टीरिया सेल आकार में गोलाकार (Cocci), रॉड-आकार (Bacilli), सर्पिल और विब्रियो शामिल हैं। 
बैक्टीरिया आमतौर पर व्यास में 200 से 1000 नैनोमीटर तक की रेंज में होता है। सबसे बड़ा बैक्टीरिया सेल खुली आंखों से दिखाई देता है। थायोमर्गारिटा नमीबियिन्सिस (Thiomagarita namibiensis) दुनिया का सबसे बड़ा बैक्टीरिया माना जाता है व्यास में 7,50,000  नैनोमीटर है जो 0.75 मिलीमीटर तक पहुंच सकता है। 

वायरस : वायरस का आकार और आकृति न्यूक्लिक एसिड और प्रोटीनों की मात्रा से निर्धारित होती है। वायरस सामान्य रूप से गोलाकार (बहुभुज) रॉड-आकार या पेंचदार आकार के कैप्सिड्स होते हैं। कुछ वायरस जैसे 'बैक्टीरियोफेज' में जटिल आकृतियाँ होती हैं। 
वायरस, बैक्टीरिया से बहुत छोटे होते हैं वे आमतौर पर व्यास में 20-400 नैनोमीटर के आकार की सीमा में रहते हैं। 
सबसे बड़े वायरस जोने जाने वाले 'पैंडोरावायरस' आकार में लगभग 1000 नैनोमीटर या पूरे माइक्रोमीटर तक में होते हैं। 

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