नोटबंदी को लेकर अब तक बहुत से विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किये हैं, और अधिकांश लोगों का मानना है कि नोटबंदी एक असफल और बेकार फैसला था, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है।
हाल ही में रिजर्व बैंक अॉफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम जी राजन ने नोटबंदी को लेकर एक बयान दिया था, उन्होंने बताया कि वो नोटबंदी के पक्ष में नहीं थे। कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के विघटनकारी फैसले से अल्पावधि में होने वाले नुकसान इसके लम्बी अवधि से होने वाले फायदों से ज़्यादा होंगे।
इसके अलावा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह ने भी नोटबंदी को गलत ठहराते हुए इसको संगठित लूट बताया। साथ ही उन्होंने चेताया कि इस फैसले के बाद भारत की जीडीपी 2% तक गिर जाएगी, बाद में उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई।
अभी गुरुवार को एसबीआई की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने नोटबंदी को लेकर चौंका देने वाला बयान दिया है उन्होंने कहा कि बैंकों को नोटबंदी के लिए और समय दिया जाना चाहिए था। नोटबंदी के दौरान बैंको पर काफी दबाव पड़ा है। अरुंधति भट्टाचार्य एक मीडिया कार्यक्रम में कहा, अगर हम किसी नई चीज़ के लिए तैयार होते हैं तब यह ज्यादा सार्थक और बेहतर होता है।
अरुंधति जी के इस बयान से लगता है कि नोटबंदी का फैसला एक आधा अधूरा फैसला था। जिसके कारण बैंकों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी थीं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर बैंकों का यह हाल था तो आम जनता का क्या होल रहा होगा।
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