जीवविज्ञानियों ने हाल ही में पता लगाया है कि सांपों में कवक रोग किसी भी प्रकार के सांप को संक्रमित करने की क्षमता रखते हैं। यदि बीमारी फैलती है, तो यह पारिस्थितिक तंत्रों के लिए एक वैश्विक खतरा पैदा कर सकता है।
लेकिन यह रोग क्या है, और यह कैसे काम करता है?
वैज्ञानिकों ने 2015 में सर्प फंगल रोग (एसएफडी), ओफिडीओमायसिस, ऑफाइओडीयिकोला का कारण बनने वाले कवक की पहचान की है। हालांकि, उत्तरी अमेरिका में कवक ज्यादा समय से मौजूद है, और 2006 में साँपों के लिए यह संभावित रूप से विनाशकारी माना जाता था, बीबीसी के मुताबिक । वास्तव में, यह इतना खतरनाक था कि यह लकड़ी के रैटलस्नेक्स की आबादी में इसके कारण आधी कमी आ गई थी जो कि 40 से केवल 20 तक हो गयी थी।कॉर्नेल वन्यजीव हेल्थ लैब के शोधकर्ताओं ने विभिन्न प्रकार के सांपों पर संक्रमण का परीक्षण किया है। उन्होंने पाया कि, संक्रमण के 12 दिनों के बाद, एक सांप कवक के लक्षण दिखा सकता है। यह आंख, नाक, मुंह, गले और फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है, और अंधापन और साँस लेने और खाने में कठिनाई पैदा कर सकता है। यह निमोनिया भी पैदा कर सकता है
चूंकि कवक शरीर के ऊपर फैलता है, यह आमतौर पर स्केल्स के ठीक नीचे रहता है, जिससे कवक की अजीब सूजन होती हैं। हालांकि, कभी-कभी यह जानवर के शरीर में घुस सकता है और एक प्रणालीगत कवक संक्रमण का कारण बन सकता है।
जबकि एंटिफंगल उपचार मौजूद है, यह उपचार केवल कुछ प्रजातियों के सांपों में काम करने के लिए जाना जाता है। कॉर्नेल के अनुसार अनुपचारित सांपों की, 40 प्रतिशत मृत्यु दर है। जबकि साँप कभी-कभी अपनी त्वचा को झाड़ कर स्वयं का इलाज करते हैं, लेकिन झाड़ना केवल समय-समय पर होता है और कभी-कभी मौके मिलने से पहले ही वे मर जाते हैं।
जबकि ज्यादातर संक्रमण यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में होते हैं, जंगल में सर्प इससे प्रभावित होते हैं और प्रयोगशाला में इतने विविध होते हैं कि वैज्ञानिकों का मानना है कि सभी साँप को यह रोग हो सकता है।
यह भी पढ़ें....
झड़ते बालों को बचाने के लिए बरतें यह सावधानियां

0 Comments