महिला सशक्तिकरण या फेमिनिज्म के नाम पर अश्लीलता?

Photo: Jacob Christ
फेमिनिज्म यानी नारीवाद अगर नारीवाद को परिभाषित करें तो इसका केवल एक ही अर्थ निकलता है 'समानता का अधिकार' इसको और स्पष्ट करें तो इसका मतलब निकलता है ' समाज में महिलाओं का पुरुषों के समान अधिकार होना' या यूं कहें कि महिलाओं का पुरुषों के बराबर का अधिकार।
इसके इतिहास में न जाते हुए अपने उद्देश्य पर आते हैं, जहां नारीवाद को लेकर हर तरफ तरह-तरह के आन्दोलन चल रहें हैं, वहीं इस आन्दोलन के पीछे इसके मकसद को न समझ कर समाज में तरह-तरह की बुराईयां और अश्लीलताएं फैलाई जा रही हैं।
यह अश्लीलताएं इन्हीं नारीवादी आंदोलनकारियों द्वारा ही फैलाई जा रही हैं, क्योंकि यह महिलाओं के अधिकारों से जुड़े असल मुद्दों को नहीं उठाते हैं, बल्कि ऐसे मुद्दों को उठाते हैं जिससे न तो महिलाओं का हित जुड़ा होता है और न ही किसी समाज का।
यह लोग केवल महिलाओं को वर्गलाने और समाज को बिगाड़ने का काम करते हैं।
अगर आप किसी ऐसे नारीवादी आंदोलनकारी से यह प्रश्न करते हैं कि, अश्लीलता क्या है?
तो वह इसकी परिभाषा नहीं बता सकता क्योंकि उनके कोई ऐसी विशेष प्रकार की क्रिया है ही नहीं जिसको अश्लील कहा जा सके, इसलिए इनके यहां अश्लील शब्द शब्दकोश में पाया ही नहीं जाता, और नहीं अश्लीलता जैसी कोई अवधारणा इनके यहां होती है, क्योंकि ऐसे लोग पॉर्नोग्राफी वेबसाइट, सार्वजनिक क्षेत्र में जोड़ों का सम्बंध बनाना, सेक्स एजुकेशन, नंगेपन और ऐसी अन्य प्रकार की क्रियाओं का समर्थन करते हैं और इनको महिलाओं हितों से जोड़ देते हैं।
इनका सबसे बड़ा हिम्मत का काम यह होता है कि यह लोग दूसरों की सोचों को जस्टिफाई कर सकते हैं, और किसी की सोच को छोटी या बड़ी में विभाजित कर सकते हैं। क्योंकि यह एक प्राधिकारी (अथोरिटी) के रूप में खुद को मानते हैं। लेकिन आप इनको जस्टिफाई नहीं कर सकते।
यह लोग जिस पैमाने के आधार पर सोच को विभाजित करते हैं वह है 'अश्लीलता और पहनावा'।
अगर आप अश्लीलता और नंगेपन के विरुद्ध हैं तो आप नीच सोच वाले हैं, क्योंकि इनके यहां अश्लीलता और नंगेपन जैसी कोई अवधारणा ही नहीं है, इसलिए जैसे ही आप अश्लीलता या नंगेपन का नाम लेंगे यह लोग आपकी सोच धावा बोलेंगे और उसको निचले स्तर की बताएंगे।
हाल ही में एक महिला नारीवादी पत्रकार ने अपने एक विडियो ब्लाॉग में कहा है कि "दो वयस्कों का शादी के बाहर किसी अन्य महिला या पुरुष से सम्बंध होना अवैध नहीं है" अगर शब्द बदल दिये जाएं तो ऐसे कहना सही होगा की एक विवाहित महिला और पुरुष का किसी अन्य से सम्बंध होना अवैध नहीं है।
या फिर ऐसे भी कह सकते हैं एक दम्पत्ति का किसी अन्य महिला या पुरुष से सम्बंध होना अवैध नहीं है।
अगर इस प्रकार का सम्बंध अवैध सम्बन्ध नहीं कहलाता तो मैं नहीं जानता कि अवैध सम्बन्ध जैसी  कोई भी अवधारणा होती है।
अगर ऐसे सम्बंध को अवैध सम्बन्ध नहीं कह सकते तो फिर, अवैध सम्बन्ध किस बला का नाम है? कौनसे सम्बंध को‌ हम अवैध कह सकते हैं?
मैं और आप अगर मिलकर सोचें तो 'अवैध सम्बन्ध'
जैसे शब्द या अवधारणा की उत्पत्ति ही व्यर्थ है।
इसका कोई मतलब ही नहीं निकलता, क्योंकि इसका न ही कहीं उपयोग हो सकता है और न ही यह कहीं लागू हो सकता है।
और अगर हम ऐसे सम्बंध को अवैध न मानें तो 'विवाह' जैसी अवधारणा का भी कोई मतलब नहीं निकलता है।
और इस प्रकार के सम्बंध को अगर हम वैध मान लें तो कल को समाज का क्या हाल होने वाला यह आज हम अच्छी तरह समझ सकते हैं।

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