कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन से निकलने वाली ऐसी लाइट जो आपके स्वास्थ्य को पहुँचाती है हानि




आज के दौर में मोबाइल फ़ोन या लैपटॉप कौन नहीं इस्तेमाल करता ?? लेकिन इससे होने वाले दुष्परिणामों से कम ही लोग वाकिफ होंगे। फिर हम अभी इन्ही से होने वाले कुछ दुष्परिणामों के बारे में जानेंगे। क्यूंकि बात जब भी हमारे स्वास्थय की हो तो लापरवाही करना सेहत के साथ खेलवाड़  करना जैसा होगा।
दोस्तों शायद आपको पता न हो तो हम आपको बता दें की  मोबाइल फ़ोन  के डिस्प्ले से लेकर लैपटॉप या डेस्कटॉप तक के डिस्प्ले से कई तरह की लाइट्स निकलती हैं दरअसल यह लाइट्स इसलिए निकलती हैं क्यूंकि यह डिस्प्ले इस तरह से बनाये गए हैं की, इनमे ढेर सारे डॉट्स लगाए गए होते हैं और जब भी डिस्प्ले हमें कुछ दिखता है, या यूँ कहें की जब भी हम कुछ देखने के लिए डिस्प्ले ऑन  करते हैं तो यह सारे डॉट्स ब्राइट होजाते हैं क्यूंकि इनमे लाइट आजाती है, ये लाइट इसलिए आती है की वो हमें कुछ दर्शा सकें। इन डॉट्स में अलग अलग रंग जलते हैं जिससे हमे डिस्प्ले द्वारा कोई चित्र दिखाई पड़ता है। ये बात तो साफ़ होगी की यह डॉट्स मिलकर रौशन होते हैं और मिलकर अलग अलग रंग को ब्राइट करते हैं, जो सब मिलकर एक चित्र हमें  दर्शाते हैं। यह डॉट्स एक साथ मिलकर कई सारे रंगो की लाइट्स छोड़ते हैं जिससे की हमे कुछ देखने को मिलता है। इन लाइट्स में एक लाइट होती है जिसको हम ब्लू लाइट कहते हैं।
और हम इसी ब्लू लाइट के बारे में बात करेंगे।
दोस्तों बहुत कम  लोगों को पता होगा की ब्लू लाइट उनकी सेहत पर कितना बुरा असर डाल सकती है। जिस तरह से हम आज मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर की आदत डाल  रहे हैं, अगर हम इनसे होने वाले बुरे असर के बारे में नहीं जानेंगे तो कल को हम मुसीबत में फस सकते हैं। 


ब्लू लाइट के दुष्परिणाम 

 ब्लू लाइट सूरज से भी निकलती है, लेकिन ये डायरेक्ट हमारी आँखों में नहीं पड़ती, जिससे हमे कोई ज़्यादा हानि नहीं पहुँचती है। सूरज से अल्ट्रा वायलेट रेज़ भी निकलती हैं जिनको हिंदी में परा बैगनी किरणे भी कहा  है इनसे बचना ज़रूरी है। लेकिन हम इसके बारे में बाद में बात करेंगे। 

दोस्तों ब्लू लाइट हमारी आँखों और शरीर के लिए बहोत खतरनाक होती हैं। इससे आँखों में तनाव और थकन आजाती है जिससे हमारी आँखे दर्द  करने लगती हैं। इससे हमारी आँखों में डार्क सर्किल आजाते हैं और हमारी नज़र भी कमज़ोर हो सकती हैं।
यूएस नेशनल टॉक्सिकोलॉजी ने अपने एक अध्ययन में पाया की इस तरह की आर्टिफीसियल लाइट के एक्सपोज़र से मोटापा, दिल की बीमारी और  कैंसर तक हो सकता है।
सूरज से जब दिन में ब्लू लाइट निकलती है तो वो हमारे दिमाग़ को सिग्नल भेजती है की अभी दिन है और सोने का समय  नहीं है। और इस तरह हमारा दिमाग़ मेलाटोनिन हॉर्मोन रिलीज़ करना बंद कर देता है। और इस तरह हम दिन में जागते रहते हैं और हमे नींद नहीं आती है।
इसी तरह जब हम रात के समय में मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं तो उससे निकलने वाली ब्लू लाइट हमारी आँखों में डायरेक्टली जाती है। और इससे हमारा दिमाग़ मेलाटोनिन हॉर्मोन रिलीज़ करना बंद कर देता है। और हमारे शरीर को सिग्नल मिलता रहता है की अभी दिन है और सोने का समय नहीं हुआ है। और इस तरह हमे नींद नहीं आती है। और ऐसे चलते रहने के कारण हम डिप्रेशन का शिकार  हो जाते हैं। 


बचने के उपाए 

इससे बचने के लिए आपको चश्मे का इस्तेमाल करना होगा जो आपको ब्लू लाइट से बचाएगा। यह ब्लू लाइट को आपकी आँखों में प्रवेश होने नहीं देगा। और उसको रिफ्लेक्ट कर देगा। यह आपको युवी यानी परा बैगनी किरणों से भी बचाएगा। इस चश्मे को एंटी ब्लू लाइट, या ब्लू लाइट कट, या ब्लू लाइट ब्लॉकर ,या ब्लू लाइट फ़िल्टर  कहते हैं। इसको आप एंटी galre फोटोक्रोमिक गिलास भी कह सकते हैं।
अगर आपके पास खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो आप कुछ एप्लीकेशन या प्रोग्राम इस्तेमाल कर सकते हैं। इनको आप एंटी ब्लू लाइट, या ब्लू लाइट कट, या ब्लू लाइट ब्लॉकर ,या ब्लू लाइट फ़िल्टर नाम से गूगल प्ले स्टोर या आई टून्स पर सर्च कर सकते हैं। इनको आप कंप्यूटर, लैपटॉप के ऐप स्टोर पर भी पा सकते हैं। या f.lux नामक सॉफ्टवेयर आप अपने कंप्यूटर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। और कलर टेम्प्रेचर को कम और नियंत्रित कर सकते हैं। 

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