अगर आपको याद होगा तो पिछले साल अगस्त के महीने में गोरखपुर के बीबीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन त्रासदी हुई थी, जिसमें ऑक्सीजन की कमी के कारण 48 घंटों में 60 बच्चों की मौत हो गई। अब इस घटना को एक साल हो गए और इसको लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा अजीबोगरीब तर्क दिया है।
आपको बता दें की पिछले साल 9 अगस्त को योगी आदित्यनाथ बीबीआरडी मेडिकल कॉलेज के दौरे पर पहुंचे थे, और यह घटना 11 अगस्त को हुई थी, ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप होने बाद अस्पताल में हाहाकार मच गया, और ऑक्सीजन न होने की वजह से दो दिन तक बच्चे मरते रहे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि हमने ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होने की जानकारी पहले ही राज्य सरकार को दे दी थी, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई अमल नहीं हुआ।
वहीं पुष्पा सेल्स का कहना है कि पेमेंट न मिलने की वजह से हमने ऑक्सीजन सप्लाई करना बंद कर दिया था। पुष्पा सेल्स का बकाया 70 लाख रुपये के करीब पहुंच गया था। फर्म ने अगस्त के पहले हफ्ते में ऑक्सीजन आपूर्ति ठप कर दी थी। घटना के बाद से ही जांच का सिलसिला लगातार जारी रहा। न्यायिक जांच, पुलिसिया जांच व विभागीय जांच के अलावा मानवाधिकार समेत तमाम संगठनों की जांच की। इस घटना के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नढ्डा , सीएम योगी आदित्यनाथ समेत शासन व प्रशासन के आला अधिकारी बीआरडी पहुंच गए। मेडिकल कालेज की खामियों को दुरूस्त करने के लिए कई योजनाएं बनी। बाहर से वार्मर और डॉक्टर भेजे गए। इसके बावजूद बच्चों की मौतों का सिलसिला कम नहीं हुआ था। वहीं राज्य सरकार का कहना है की अस्पताल प्रशासन की ओर से ऑक्सीजन की कमी को लेकर कोई सूचना नहीं दी गयी थी। इस मामले को लेकर पूर्व प्राचार्य व उनकी पत्नी समेत नौ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की जांच में पुलिस ने पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, डॉ. कफील खान और क्लर्क सुधीर पाण्डेय को गिरफ्तार किया था। इस घटना के समय शासन से जुड़े लोगों के अजीबोगरीब बयान आ रहे थे, कोई कह रहा था कि इन मौतों को नहीं रोका जा सकता अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं, और वहीँ कुछ लोग ऐसे बयानों को अपने अपने ढंग से उचित ठहरा रहे थे। दूसरी ओर योगी सरकार इसका ज़िम्मेदार अखिलेश और मायावती सरकार को ठहरा रही थी।
बहरहाल जब यह मामला हाई कोर्ट पंहुचा तो यहां योगी सरकार का यू टर्न और दोगली निति सामने आयी। योगी सरकार इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में जब हलफ़नामा देती है, तो उसमें स्वीकार करती है कि बच्चों की मौतों की संभावना पुष्पा सेल्स को भुगतान न देने के कारण, ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप होने से और ऑक्सीजन की कमी से हुई थी। और इस घटना के एक साल बाद योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, केजीएमयू में शनिवार को पोषण अभियान और सुपोषण स्वास्थ्य मेले का उद्घाटन करने के दौरान बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना पर सफाई देते हुए कहा की "अगर ऑक्सीजन के अभाव से बच्चों की मौत होती तो सबसे पहले वो बच्चे मरते जो वेंटीलेटर पर हैं वे बच्चे पहले वाले आज भी वैसे ही हैं उनके स्वास्थ्य में पहले की तुलना में सुधर है"
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है, की बच्चों की मौत का कारण अस्पताल की आंतरिक राजनीती है, और नकारात्मक समाचार है, जो फैलाया जा रहा था। अगर वास्तव में यह कारण था तो फिर हाई कोर्ट में दिए गए अपने हलफनामे में यह क्यों स्वीकार किया कि इस घटना का कारण 'ऑक्सीजन की कमी थी जिसका भुगतान पुष्पा सेल्स को न देने पर इसकी सप्लाई रोकी गयी थी?
इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि योगी सरकार केवल अपने लोगों को बचाना चाहती है। जसिकी मजबूरी में कुछ भी बहाने बनाये जा रहे हैं।

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