इस्लाम धर्म के अनुसार मरने के बाद क्या होता है ?


बहुत से लोगों को यह जानने की जिज्ञासा होती होगी कि मरने के बाद इंसान का क्या होता होगा? वह कैसा महसूस करता होगा? उसके साथ कैसी घटनाएं घटती होंगी? 'क्या मरने के बाद इंसान का पूरा अस्तित्व ही समाप्त हो जाता है'? या उसकी आत्मा जीवित रहती है, और उसमें एहसास बाकी रहता है? क्या वह अपने आस पास की चीज़ों को देख और महसूस कर सकता है या नहीं?  
इस प्रकार के बहुत सारे सवाल मन में आते होंगे। और इन सवालों के जवाब पाने की उत्सुकता मन में रहती होगी। 
शरीर और आत्मा को लेकर हर धर्म के अपने अलग-अलग विचार हैं। ऐसा कोई धर्म नहीं होगा जो आत्मा को न मानता हो। सभी धर्म यही कहते हैं कि जब आत्मा शरीर से निकल जाती है, तो आदमी की मृत्यु हो जाती है। हालाँकि हर धर्म में मृत्यु को अलग-अलग शब्दों से संबोधित किया गया है। कोई इसे आत्मा कहता है तो कोई रूह और कोई स्पिरिट, लेकिन मतलब इनका एक ही है।
हम सभी धर्मों की आत्मा के सन्दर्भ में क्या अवधारणा है इसकी बात न करते हुए इस्लाम में आत्मा को लेकर क्या विचार हैं इसको समझेंगे। 
इस्लाम धर्म के अनुसार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होने वाली रहती है तो उस व्यक्ति की रूह कब्ज़ करने यानी अपने वश में करने के लिए एक फरिश्ता आता है जिसका नाम 'इज़राईल' है, जिसको अरबी भाषा में मलकुलमौत कहते हैं। 
इज़राईल फरिश्ता रूह को शरीर से निकल कर अपने वश में कर लेता है। इज़राईल जब किसी पापी व्यक्ति की आत्मा निकालता है उसको बहुत पीड़ा होती है, जिसको वह सहन भी नहीं कर सकता। इज़राईल पापियों के पास बहुत डरावनी शक्ल में प्रकट होता है। ऐसा भी माना जाता है की इज़राईल अन्याय करने वाले व्यक्ति की आत्मा को बहुत तड़पा कर निकालता है। इसलिए इस्लाम में न्याय का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया गया है। 
इसी तरह जब यह मौत का फरिश्ता किसी अच्छे और नेक आदमी के पास आता है तो अच्छी शक्ल में आता है और उस आदमी को ऐसे निकालता है, कि उस व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता है, या उसको बहुत अच्छा सा महसूस होता है। ऐसा भी मानना है की उसको ऐसा लगता है कि उसके शरीर से बोझ हल्का हो गया है। 
व्यक्ति के मरने के बाद उसको 'बरज़ख़' जिसको हम हिंदी में अवरोध कह सकते हैं इसको आमतौर पर शारीरिक और आध्यात्मिक दुनिया के बीच बाधा के रूप में जाना जाता है। इसको अवरोध इसलिए भी कहते हैं क्यूंकि यह नरक और स्वर्ग के बीच एक जगह है, जहाँ क़यामत तक आत्माएं रहेंगी और नरक और स्वर्ग का अनुभव करेंगी।
कोई अच्छा आदमी मरता है तो वह बरज़ख़ में स्वर्ग का अनुभव करता है, इसके विपरीत जब कोई पापी और दुष्कर्मी मरता है तो वह बरज़ख़ में नरक का अनुभव करता है।       
इसके अलावा बुरे व्यक्तियों की आत्माओं को वादी-ए-बर्हूत ले जाया जाता है, और वहीं यह आत्माएं सजा काटती हैं। वादी-ए-बर्हूत को इंग्लिश में 'लैंड ऑफ़ पनिशमेंट' यानी सजा की भूमि कहा जाता है। 

अच्छे और भले व्यक्तियों की आत्माएं वादी-ए-सलाम में रखी जाती हैं, जिसको इंग्लिश में 'लैंड ऑफ़ पीस' भी कहा जाता है जिसका हिंदी अनुवाद शांति की भूमि होता है। यहां यह आत्माएं सुकून से रहती हैं। 
बहरहाल विज्ञानं केवल मैटर यानी माद्दा जो चीज़े दिखाई देती हैं केवल उन्हीं को मानता है। और आत्मा जैसी चीज़ों को नहीं मानता है। 

Post a Comment

0 Comments