लेकिन इसमें असली झोल शुरू होता है तब जब आप अकाउंट खोल लेते हैं।
जी हाँ आपसे अकाउंट खुलने के बाद कहा जायेगा कि KYC यानी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा लीजिये जिससे आपके अकाउंट की बाधित सेवायें चालु हो जाएंगी और साथ ही नगद जमा करने की और रखने की जो सीमा होती है वो हट जाती है। आप सोचेंगे की छोड़ो नहीं चाहिए ज़्यादा सेवाएं और डिपाजिट भी नहीं ज़्यादा रखने तो क्या करेंगे KYC या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का ? अगर यह सोच कर आप बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं कराते हैं, तो फिर आपको मालूम पड़ेगा कि नहीं कराने की सूरत में आपका अकाउंट फ्रीज़ हो जायेगा। अब आप सोचेंगे की चलो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा ही लेते हैं, तो उसके लिए आपको पहले तो ब्रांच जाना पड़ेगा। और ब्रांच जाने पर अगर आपका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन हो जाए तो शुक्र करिये। लेकिन ऐसा होगा नहीं। आपसे फॉर्म भरवाया जायेगा और नार्मल सेविंग्स अकाउंट में कन्वर्ट कराने को बोला जायेगा, जो की जीरो बैलेंस वाला नहीं होगा इसमें आपको मिनिमम बैलेंस मेन्टेन्स करना होगा। और न करने पर चार्ज लगेगा। बैलेंस जमा कीजिये या फिर अपना जीरो बैलेंस डिजिटल सेविंग्स अकाउंट को फ्रीज होने दीजिये, क्यूंकि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन तो होने से रहा।
वैसे आपको बता दें इस तरह के अकाउंट की सुविधा आपको कई बैंक दे रहे हैं जैसे एक्सिस बैंक का ASAP अकाउंट, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का YONO डिजिटल सेविंग्स अकाउंट, कोटक महिंद्रा का 811 .
अगर यह एसबीआई का डिजिटल सेविंग्स अकाउंट है तो आपसे जीरो बैलेंस डिजिटल अकाउंट के नाम पर 1300 रूपये हेल्थ इन्शुरन्स के नाम पर लिया जाएगा, जब आप अपना रेफ़्रेन्स नंबर लेकर ब्रांच पहुंचेंगे तो वैसे ये नंबर ऑनलाइन अकाउंट खोलने पर मिलता है। इसलिए आप से अनुरोध है की ऐसे अकाउंट से सावधान रहें।

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