यूपी के मऊ जिले में स्थित कुर्थी जाफरपूर एक ऐसा गांव है जहां विकास के नाम पर केवल ऊबड़ खाबड़ सड़कें और बेहाल बिजली के तार हैं। वैसे तो बड़े विकास के नारे लगाए जा रहे हैं, लेकिन इस गांव में विकास केवल आबादी में ही हुआ है। करीब तीन लाख की आबादी वाले इस गांव में न तो पूरी तरह से परिवहन और यातायात के साधन हैं और न ही अस्पताल एवं चिकित्सा के कोई साधन हैं। यातायात और परिवहन की बात करें तो यहां की पतली पतली सड़कें शहर से जुड़ तो गईं हैं लेकिन यह सड़कें केवल इस गांव तक ही सीमित हैं। अगर यही सड़कें सीमित न होकर किसी अन्य स्थान से जुड़ी रहतीं तो यातायात और परिवहन के पुरी सुविधा होती। लेकिन ऐसा नहीं है इस गांव में जिस रास्ते से प्रवेश किया जाता है उसी से बाहर भी जाना पड़ता है। जिसके कारण गांव में आने और जाने के लिए घण्टों गाड़ी में बैठकर सवारी का इन्तजार करना पड़ता है। क्योंकि बिना पूरी सवारी के गाड़ी चल नहीं सकती क्योंकि या गाड़ी के चालक जानते हैं कि जहां वे जा रहे हैं उस रास्ते से दूसरी जगह की कोई सवारी तो मिलेगी नहीं इसी लिए एक जगह पर इस गांव में जाने वाली सवारियों का इन्तजार करना पड़ता है। जैसा कि आप इन तस्वीरों से अन्दाजा लगा सकते हैं कि कैसे हालात हैं यहां की सड़कों के.यह वही सड़कें हैं जो गांव के बाहर ले जातीं हैं। सरकारें बदलती गईं लेकिन अभी तक नहीं बदल पाया देश इस देश में न जाने कितने ही ऐसे गांव होंगे जहां के हालात इससे भी बुरे होगें जहां एक तरफ विकास विकास के नारे लगाए जाते हैं वहीं दूसरी ओर ऐसी तस्वीरें भी सामने आती हैं जिससे पता चलता है कि विकास केवल वादों और नारों में ही है। जमीन पर इसका अस्तित्व ना के बराबर है। और यह भी एक सच है कि अभी भी हम बहुत पीछे हैं। यह तो बात थी यातायात साधनों की अब करते हैं बिजली की जैसा कि आप तस्वीरों में देख रहे होंगे की किस तरह मौत को दावत देते बिजली के तार बांस के सहारे नियंत्रित किये गये हैं।
बिजली की बात करें तो बिजली यहां कभी अपना निरंतर बना कर टिक नहीं सकती हर रह मिनट में आती जाती है। और कभी तो लम्बे समय तक आती ही नहीं। दिन का दिन रात की रात गायब ऐसा लगने लगता है कि मानो बिजली कभी थी ही नहीं। और तारों और खम्भों की हालत तो ऐसी है कि अगर हवा का छोंका भी लग जाता है तो बिजली कई दिनों तक गायब रहती है। आप यहां के हालात को तस्वीरें देखने के बाद अच्छे से समझ सकते हैं।
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