राष्ट्रगान की सच्चाई जान कर सन्न रह जायेंगे आप


अभी हाल ही में एक मदरसे के कुछ मौलवियों को राष्ट्रगान न गाने पर और ना गाने देने पर गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले भी राष्ट्रगान का मुद्दा काफी गरम रह चुका है ,राष्ट्रगान न गाने को लेकर काफी विवाद हुआ है, जहाँ कुछ लोग राष्ट्रगान गाने को देशभक्ति और राष्ट्रवाद का प्रमाण मानते हैं, तो वहीं समाज का एक तबका इसे गाने से परहेज़ करता है और इसको गाना ज़रूरी नहीं समझता है। और कुछ लोग तो इसे धर्म के चश्मे से देखते हैं, और राष्ट्रगान गाने को गलत ठहराते हैं। बहरहाल इनमें कौन सही है और कौन गलत इसका फैसला तो बस देश का संविधान और सर्वोच्च न्यायलय ही तय कर सकता है। और हम यह फैसला क़ानून के हाथ में छोड़ दें तो ही बेहतर होगा। 
लेकिन हमें एक बात समझना बहुत ज़रूरी है, कि क्या यह राष्ट्रगान हमारे देश की महानता, महिमा और गौरव को दर्शाता है, या उसके विपरीत यह हमारे देश का अपमान करता है। 
राजीव दीक्षित जी जबतक जीवित थे तबतक इस उन्होंने कभी इस राष्ट्रगान को नहीं गाया और उनका यह कहना भी था कि जबतक मैं जीवित रहूँगा इस राष्ट्रगान को नहीं गाऊंगा। याद रहे कि की इस राष्ट्रगान से तात्पर्य 'जन गण मन' है। ऐसा क्या है इस राष्ट्रगान या गीत में जिसको गाने से राजीव दीक्षित ने इंकार कर दिया?और मुस्लिम समाज के भी कुछ लोग इस गीत को गाने से परहेज़ करते हैं, जबकि दूसरे देशभक्ति के गीत गाने से कोई संकोच नहीं है। 
राजीव दीक्षित जी का कहना था कि यह गीत रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजी हुकूमत की चापलूसी में लिखा था। और यह गीत पहली बार अँगरेज़ राजा जॉर्ज पंचम के स्वागत में खुद रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गाया था। जब पहली बार किंग जॉर्ज पंचम कलकत्ता गया तो उसके सम्मान और स्वागत में यह गीत पहली बार गाया गया था, और इस गीत को खुद रबीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने मुंह से गाय था। 
राजीव जी आगे इस गीत का मतलब समझाते हुए कहते हैं कि,

जनगणमन आधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जिसका हिंदी अनुवाद होता है :
जन गण के मनों के उस अधिनायक की जय हो, जो भारत के भाग्यविधाता हैं!

पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग
जिसका हिंदी अनुवाद होता है :
उनका नाम सुनते ही पंजाब सिन्ध गुजरात और मराठा, द्राविड़ उत्कल व बंगाल
एवं विन्ध्या हिमाचल व यमुना और गंगा पे बसे लोगों के हृदयों में मनजागृतकारी तरंगें भर उठती हैं

तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे
गाहे तव जयगाथा
जिसका हिंदी अनुवाद होता है :
सब तेरे पवित्र नाम पर जाग उठने हैं, सब तेरी पवित्र आशीर्वाद पाने की अभिलाशा रखते हैं
और सब तेरे ही जयगाथाओं का गान करते हैं।

जनगणमंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता!
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।।
जिसका हिंदी अनुवाद होता है :
जनगण के मंगल दायक की जय हो, हे भारत के भाग्यविधाता
विजय हो विजय हो विजय हो, तेरी सदा सर्वदा विजय हो 

राजीव दीक्षित कहते हैं कि यह पूरा गीत जॉर्ज पंचम के सम्मान को दर्शाता है, जहाँ कभी उसको जनता के मन का अधिनायक बताया जा रहा है और कभी भारत के भाग्यविधाता से संबोधित किया जा रहा है। 
बहरहाल इसमें कितनी सच्चाई है यह तो इतिहास ही बता सकता है, या फिर राजीव दीक्षित जी बता सकते थे। 

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