जो लोग किसी ओपन यूनिवर्सिटी या बोर्ड से पढ़ाई करने की सोचते हैं, उनके मन में यह विचार ज़रूर आता होगा कि क्या ओपन से पढ़ाई करना सही है ?
ओपन यूनिवर्सिटी को हिंदी में मुक्त विश्वविद्यालय कहते हैं।
क्यूंकि कुछ लोगों को ऐसा भ्रम होता है की ओपन बोर्ड या यूनिवर्सिटी की मार्कशीट और डिग्री मान्य नहीं होती। क्यूंकि ओपन बोर्ड या यूनिवर्सिटी हमें डिस्टेंस मोड वाली शिक्षा पद्धति प्रदान कराती है।
डिस्टेंस मोड क्या है ?
डिस्टेंस मोड सामान्य भाषा में कहें तो दूर रह कर पढ़ना। इसके तहत आप कहीं पर भी हों वहीँ से पढ़ाई कर सकते हैं, आपको रेगुलर की तरह रोज़ाना क्लास करने यूनिवर्सिटी या स्कूल नहीं जाना होगा बल्कि आप अपनी मर्ज़ी से खुदका एक अध्ययन केंद्र चुन सकते हैं, जहाँ आपको हफ्ते में २ दिन क्लास मिलेंगी। कुछ विषयों के लिए क्लास ज़रूरी नहीं होती हैं और आप घर रहकर भी अपनी पढ़ाई कर सकते हैं। ओपन यूनिवर्सिटी और बोर्ड खासकर उन्ही लोगों के लिए है, जो ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं, या गृहिणी हों या कामकाजी लोग, या आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग। क्यूंकि ग्रामीण क्षेत्र में एक तो यूनिवर्सिटी या अच्छे कॉलेज नहीं होते दूसरे ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के लिए वहां से शहर जा कर क्लास करने में बहोत दिक्कत होगी। इसी तरह गृहिणी को भी दिक्कतें आएँगी।इन सब कठिनाईओं को मद्देनज़र रखते हुए ओपन यूनिवर्सिटी बनायीं गयी हैं। जहाँ ऐसे लोगों को पढ़ाई करने में कोई समस्या नहीं आएगी। क्यूंक यहां क्लास करना ज़रूरी नहीं होता है। और आप अपने पास में ही कोई शिक्षा केंद्र (स्टडी सेंटर) खोज कर वहीँ क्लास कर सकते हैं। ओपन यूनिवर्सिटी आपको अध्ययन सामग्री प्रदान कर देगी जिससे आप अपनी परीक्षा की तयारी और पढ़ाई कर सकते हैं।
अब रही बात इसकी मार्कशीट और डिग्री के मान्य होने की तो अगर यूनिवर्सिटी U.G.C. द्वारा प्रमाणित है तो उसकी मार्कशीट और डिग्री दोनों ही मान्य हैं। अगर U.G.C. द्वारा प्रमाणित नहीं है, तो फिर चाहे वो रेगुलर यूनिवर्सिटी ही क्यों ना हो उसकी डिग्री और मार्कशीट की कोई अहमियत नहीं होगी।
जैसा कि आप लोगों को पता होगा की भारत की सबसे बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी 'इंदिरा गाँधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी' जिसको संक्षेप में इग्नू कहते हैं। इसके नाम में ही नेशनल लगा हुआ है, यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी है इसलिए इस पर बिलकुल भी संदेह नहीं किया जा सकता। और इसकी मार्कशीट और डिग्री हर जगह पे मान्यता रखती है।
ओपन से पढ़ना सही या ग़लत ?
अब रही बात ओपन से पढ़ने की तो, अगर आप कोई काम कर रहे हैं और काम के साथ साथ पढ़ाई भी करना चाहते हैं, तो आपके लिए ओपन से पढ़ना आसान और अच्छा भी रहेगा। अगर आप हाउस वाइफ हैं और घर पे ही रहती हैं, तो भी आपके लिए ओपन से पढ़ना बेहतर रहेगा। अगर आपका एडमिशन किसी रेगुलर यूनिवर्सिटी में नहीं हो पाया तो साल ख़राब करने से बेहतर होगा की आप किसी ओपन यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लें। आपको बता दें की इग्नू के दो प्रवेश सत्र होते हैं, एक जनवरी के लिए और एक जुलाई के लिए। और यहां प्रवेश के लिए बहोत समय मिलता है।
इसी तरह जो लोग ऐसे क्षेत्र में रहते हैं, जहाँ से कॉलेज या यूनिवर्सिटी बहुत दूर हो, तो उनके लिए भी ओपन यूनिवर्सिटी बेहतर है। और जो आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं उनके लिए भी ओपन यूनिवर्सिटी बेस्ट है।
लेकिन अगर आपको उपरोक्त समस्याओं में से कोई समस्या नहीं है, तो आपके लिए रेगुलर यूनिवर्सिटी ही बेहतर होगी। क्यूंकि जब आप रेगुलर क्लास जाते हो तो इससे कहीं न कहीं आपका सामाजिक विकास होता है, आपको कई सारे अनुभव प्राप्त होते हैं। और साथ ही आपके व्यक्तित्व का विकास होता है।
इस तरह से देखा जाए तो इसमें गुण और दोष, लाभ और नुकसान दोनों ही शामिल हैं। हालाँकि इसकी डिग्री और रेगुलर की डिग्री की मान्यता में कोई अंतर नहीं है।



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