बकरीद को लेकर योगी के फरमान का उल्टा असर


बकरीद आने के पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपने अफसरों को कुछ आदेश जारी किये थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि बकरीद के दिन कोई भी कुर्बानी खुले में या रास्तों में नहीं होनी चाहिए, साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा इसके लिए खून या गोश्त का टुकड़ा नालियों में नहीं बहना चाहिए, किसी गौवंश की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ योगी जी ने प्रशासन से भी कड़ी निगरानी और सुरक्षा बनाये रखने को कहा जिससे त्यौहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा सके। इसके अलावा योगी जी ने अफसरों को यह भी आदेश दिया कि त्यौहार के मौके पर बिजली और पानी की सही ढंग से आपूर्ति होनी चाहिए जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। 
जहाँ योगी जी बिजली और पानी की कटौती करने को मना कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मऊ के ग्राम कुर्थी जाफरपुर में बकरीद के अगले दिन से ही बिजली गुल हुई, और ऐसी गुल गई कि चौबीस घंटे गुजरने के बाद भी बिजली का कोई अता पता नहीं रहा। ऐसा लगता है जैसे कभी इस गाँव में बिजली थी ही नहीं लोग बस अब उस पल के इंतज़ार में हैं कि कब उनके घरों में टंगे पंखे घूमना शुरू करेंगे। बड़े आश्चर्य की बात है कि आज़ादी के 72 सालों के बाद भी गॉंवों की हालत वैसी ही है जैसे पहले थी। वादे और दावे तो बहुत बड़े बड़े हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत उससे बिलकुल ही अलग दिखाई देती है। कब तक गॉंवों और शहरों में फर्क समझा जायेगा ?
गाँव में 18 और शहर में 24 घंटे बिजली का एलान क्यों किया जाता है ? क्या इससे सरकार यह बताना चाहती है कि गाँव की औकात शहर की तुलना में कम है ?
जबकि इन्हीं गॉंवों ने तो शहरों को जन्मा है। खैर गांव के लोग तो 18 घंटे बिजली से भी खुश रहते हैं लेकिन जब बिजली मिले तब तो खुश हों। यहां तो बिना वजह दो दो दिनों तक बिजली का पता होता ही नहीं है। 

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