जहाँ योगी जी बिजली और पानी की कटौती करने को मना कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मऊ के ग्राम कुर्थी जाफरपुर में बकरीद के अगले दिन से ही बिजली गुल हुई, और ऐसी गुल गई कि चौबीस घंटे गुजरने के बाद भी बिजली का कोई अता पता नहीं रहा। ऐसा लगता है जैसे कभी इस गाँव में बिजली थी ही नहीं लोग बस अब उस पल के इंतज़ार में हैं कि कब उनके घरों में टंगे पंखे घूमना शुरू करेंगे। बड़े आश्चर्य की बात है कि आज़ादी के 72 सालों के बाद भी गॉंवों की हालत वैसी ही है जैसे पहले थी। वादे और दावे तो बहुत बड़े बड़े हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत उससे बिलकुल ही अलग दिखाई देती है। कब तक गॉंवों और शहरों में फर्क समझा जायेगा ?
गाँव में 18 और शहर में 24 घंटे बिजली का एलान क्यों किया जाता है ? क्या इससे सरकार यह बताना चाहती है कि गाँव की औकात शहर की तुलना में कम है ?
जबकि इन्हीं गॉंवों ने तो शहरों को जन्मा है। खैर गांव के लोग तो 18 घंटे बिजली से भी खुश रहते हैं लेकिन जब बिजली मिले तब तो खुश हों। यहां तो बिना वजह दो दो दिनों तक बिजली का पता होता ही नहीं है।

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