युद्ध ऐसी स्थिति होती है जिसमें केवल नुक्सान ही होता है चाहे धन का हो या इंसान की जान का। अगर दो देशों के बीच युद्ध हो रहा हो और अगर उसमें से एक देश युद्ध जीत भी जाए तब भी उसका नुक्सान ही होता है। क्यूंकि युद्ध के लिए किसी भी देश युद्ध की सामग्री यानी हथियार और सैन्य बल चाहिए होता है और इसके लिए धन चाहिए होता है। युद्ध के कारण देश कंगाल हो जाता है। युद्ध की स्थिति यह होती है कि यह लोगों की ज़िन्दगियों को तहस नहस कर देती है। जब दो देश आपस में लड़ रहे होते हैं तो इस लड़ाई में सैकड़ों लोग मारे जाते हैं, बच्चे यतीम और औरतें विद्वा हो जाती हैं। युद्ध से केवल उनका फ़ायदा होता है जो इंसानों की ज़िन्दगियों पर राजनीति करते हैं।
हम आपको बताएँगे ऐसी युद्ध के बारे में जिसमें 3000 अमेरिकी सैनिकों ने इस्लाम क़ुबूल कर लिया था।
हम आपको बताएँगे खाड़ी युद्ध के दौरान घटी कुछ बातों के बारे में। हम आपको बताएँगे कि क्यों खाड़ी युद्ध के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों ने इस्लाम क़ुबूल कर लिया था ?
इसके बारे में जानकार मानते हैं कि अमेरिकी सैनिकों को इस्लाम के बारे जो उनके देश में पता चला था वह महज़ सुनी सुनाई बात थी। लेकिन जब वे खाड़ी युद्ध में भाग लेने आये तो उन्हें वे लोग मिले जो इस धर्म को असल में मानते थे। जब उनको मालूम हुआ कि यह धर्म तो अमन का मज़हब है इसमें ह्यूमन राइट्स का पूरा ध्यान रखा गया है तो पहले खाड़ी युद्ध के दौरान लगभग 3 हज़ार अमेरिकी सैनिक मुसलमान हो गए। यह एक शानदार दृश्य था। इसमें ग़ौर करने की बात है कि जो आक्रमणकारी फ़ौज है वही दूसरे देश के धर्म को मानने लगी। इसका साफ़ अर्थ यह निकलता है कि वह लोग इस्लाम की बताई बातों से आकर्षित हो गए और इस्लाम क़ुबूल कर लिया। इस्लाम की यह खासियत है कि यह मुहब्बत से लोगों का दिल जीतता है और अपनी ओर आकर्षित करता है। तलवार के बल पर न धर्म फैलता है और ना ही फैल सकता है।

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