18 सितम्बर को लखनऊ में हुई योगी सरकार की कैबिनेट मीटिंग में उत्तर प्रदेश में हो रहे सरकारी खर्च में कटौती और कमी करने के लिए अहम फैसले लिए हैं। और अगर सच में यह लागू हो जाते हैं, तो सरकारी ख़ज़ाने से काफी बोझ हल्का हो जायेगा।
इस मीटिंग में तय किया गया है कि:
बिना ज़रुरत के कोई भी सरकारी अफसर विदेश यात्रा नहीं करेगा, अगर यात्रा करनी भी हो तो इकॉनमी क्लास में ही करेगा।
पुलिस विभाग को छोड़ कर किसी भी विभाग में नई गाड़ियों की खरीद नहीं की जाएगी अगर ज़रुरत हो तो आउटसोर्सिंग के ज़रिये यह काम कराया जायेगा।
सरकारी विभागों में नए साल पर कैलेंडर और डायरी नहीं बांटी जाएँगी।
बिना ज़रुरत के विज्ञापन और प्रसार नहीं किया जायेगा, सरकारी दफ्तर के खर्चे में कटौती की जाएगी।
अगर कोई अधिकारी किसी नए पद पर आता है, तो उसके लिए नए सिरे से फर्नीचर और डेकोरेशन का इंतेज़ाम नहीं किया जायेगा।
विभिन्न विभागों के सलाहकार, अध्यक्ष या सदस्य जैसे अस्थाई पदों के लिए सहयोगी स्टाफ की भर्ती नहीं होगी। सहयोगी स्टाफ की व्यवस्था सरप्लस स्टाफ या आउटसोर्सिंग से की जाएगी।
विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, प्राधिकरण और राज्य के अधीन आने वाली संस्थाएं अब नए गेस्ट हाउस नहीं बना पाएंगी।
नए बने ज़िलों के अलावा किसी भी जगह पर अब नए ऑफिस या सरकारी घर नहीं बनाये जायेंगे।
किसी भी फाइव स्टार या इस तरह के होटलों में सरकारी बैठकें नहीं होंगी। अगर बैठक करना है, तो सरकारी ऑफिस का इस्तेमाल किया जायेगा।
सरकारी खाने का इंतेज़ाम फाइव स्टार होटल में नहीं किया जायेगा। अगर बेहद ज़रूरी हो तो मुख्य सचिव की अनुमति से ही इसका इंतेज़ाम किया जायेगा।
यह हैं योगी सरकार के वह फैसले जिनको लागू करके योगी सरकार उत्तर प्रदेश में होने वाले सरकारी खर्च को कम करेगी और इससे काफी हद तक सरकारी ख़ज़ाने की बचत होगी।

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