पिछले 42 सालों से क़ुरआन की पूजा करता आया है यह हिन्दू परिवार


आज कल जितनी हिन्दू मुस्लिम पर बहस हो रही है और जितना दोनों समुदायों को एक दूसरे के खिलाफ बढ़काया जा रहा है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि दोनों समुदाय आपस में दुश्मन बन गए हैं। नेताओं ने अपने वोटों के लिए दोनों समुदायों के बीच इतना ज़हर घोल दिया है कि अब कोई उम्मीद भी नहीं कर सकता है कि दोनों समुदाय एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करते हों। क्यूंकि आये दिन ऐसी घटनाएं पेश आती हैं जिससे अंदाज़ा लगता है कि राजनीती ने दोनों समुदायों को एक दूसरे से कितना अलग कर दिया है। नेताओं ने दोनों समुदायों में ऐसा ज़हर का बीज बोया है कि अब एकता की बात करने वाले मुश्किल से ही मिलते हैं।
लेकिन हम आपको ऐसे परिवार के बारे में बताएँगे जो कई सालों से क़ुरआन की पूजा करता आ रहा है। हम बात कर रहे हैं एक हिन्दू परिवार की जो श्रीमद्भागवत गीता का जितना सम्मान करता है उतना ही सम्मान क़ुरआन शरीफ का भी करता है। हम बात कर रहे हैं अजमेर के एक हिन्दू परिवार की जिनके घर में 42 वर्षों से क़ुरआन मौजूद है।
बालकिशन खण्डेवाल अजमेर के रहने वाले हैं और हिन्दू धर्म में विश्वास रखते हैं। लेकिन उनका परिवार धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल माना जा सकता है। कई वर्षों से उन्होंने अपने घर में क़ुरआन पाक को सुरक्षित रखा हुआ है और उसका खूब एहतेराम भी करते हैं। क़ुरआन पाक जितना प्रिय मुसलामानों के लिए है उतना ही प्रिय बालकिशन खण्डेवाल के लिए भी है।
खण्डेवाल बताते हैं कि 42 साल से क़ुरआन शरीफ उनके घर में मौजूद है, वे बताते हैं जो क़ुरआन शरीफ उनके घर में है वह दुनिया का सबसे छोटा क़ुरआन शरीफ है। उन्होंने बताया की इसको पढ़ने के लिए उनको लेंस की मदद लेनी पड़ती है। वे बताते हैं उसका आकार इतना छोटा है कि उसको माचिस की डिब्बी में भी रखा जा सकता है। लम्बाई और चौड़ाई के लेहाज़ से यह 1.8 सेंटीमीटर लम्बा और इतना ही चौड़ा है। इसका वज़न 1.950 ग्राम है जबकि इसमें कुल पेजों की संख्या 258 है। खण्डेवाल की क़ुरआन में आस्था को देख कर यह माना जा सकता है कि अभी भी इस मुल्क में ऐसे लोग हैं जो धार्मिक सहिष्णुता के नायक हैं।

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