सावधान: बहुत अधिक एंटीबायोटिक खाने वालों के शरीर से ख़त्म हो रही है यह ज़रूरी चीज़


एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कुछ प्रकार के जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिया किया जाता है या जीवाणु के कारण होने वाले संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है। एंटीबायोटिक दवाएं जीवाणुओं को मारकर उनके पुनरुत्पादन और फैलने से रोकने का काम करती हैं।
एंटीबायोटिक दवाएं कई प्रकार की होती हैं जिनको ऐसी बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है जो जीवाणु संक्रमण के कारण होती है। इसलिए अक्सर आपने देखा होगा कि डॉ दूसरी दवाओं के साथ एंटीबायोटिक भी देते हैं ताकि बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा न हो और अगर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण बीमारी हुई हो तो ख़त्म हो जाये। लेकिन अगर एक तरफ एंटीबायोटिक हमें बीमारियों से बचाती है तो दूसरी तरफ इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं।
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इन दवाओं का अत्याधिक उपयोग शरीर के लिए कुछ अच्छा करने की बजाए उसे नुकसान पहुंचा सकता है।
एंटीबायोटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। जरुरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स दवाइयां खाने से प्रतिरोधी कोशिकाओं को दुरुस्त रखने और संक्रमणों को दूर रखने वाले शरीर के 'अच्छे' विषाणु मर सकते हैं।
इस अध्ययन में पाया गया कि शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से लड़ने और अवांछित जलन एवं सूजन को कम करने में प्रभावी हैं तथा एंटीबायोटिक्स ऐसी प्राकृतिक क्षमताओं को रोक सकते हैं।
अमेरिका की ‘केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी’ के अनुसंधानकर्ताओं ने “शरीर में रहने वाले” विषाणु, उनके फैटी एसिड और श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) के कुछ प्रकारों का विश्लेषण किया जो मुंह के संक्रमण से लड़ने में सक्षम होते हैं।
केस वेस्टर्न में सहायक प्राध्यापक एवं प्रमुख अनुसंधानकर्ता पुष्पा पंडियान ने कहा, “हमने यह जानने के लिए प्रयोग किया अगर किसी फंगल संक्रमण से लड़ने के लिए हमारे पास विषाणु नहीं होगा तो क्या होगा"। इन अनुसंधानकर्ताओं में भारतीय मूल के वैज्ञानिक नटराजन भास्करन और शिवानी बुटाला शामिल थी।
उन्होंने बताया कि जानलेवा संक्रमणों को ठीक करने के लिए अब भी एंटीबायोटिक्स की जरूरत पड़ती है. पंडियान ने कहा, “हमारे शरीर में प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमताएं मौजूद हैं और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए. एंटीबायोटिक्स के बेवजह अत्याधिक प्रयोग से कोई लाभ नहीं होता"।
अब ऐसा नहीं है कि हमें एंटीबायोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल छोड़ देना चाहिए क्यूंकि अगर हम एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बिलकुल बंद कर देते हैं तो जीवाणुओं से होने वाले हर संक्रमण को हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नहीं ख़त्म कर पाएगी। इसलिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बस ज़रुरत भर होना चाहिए। आपको बता दें कि जीवाणु संक्रमण से कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है और इस प्रकार के संक्रमण को रोकने और ख़त्म करने के लिए भी हमें एंटीबायोटिक्स की ज़रुरत पड़ती है। इसलिए कुछ दुष्प्रभाव के कारण हम एंटीबायोटिक को पूरी तरह से छोड़ नहीं सकते हैं। हालांकि सिर्फ एंटीबायोटिक्स ही क्यों कोई दूसरी दवा भी आप ज़्यादा इस्तेमाल करेंगे तो वह भी आपको नुक्सान पहुंचा सकती है।

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