सावधान: भारत में 68 प्रतिशत दूध के नाम पर बिकता है ज़हर



रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2018 तक प्रतिदिन 14 करोड़ 68 लाख लीटर दूध का उत्पादन हुआ है, जबकि दूध की रोज़ाना की खपत 64 लीटर से भी ज़्यादा है। यानी दूध की खपत दूध के उत्पादन से चार गुना से भी ज़्यादा है।
इससे साफ़ पता चलता है कि हमारे देश में जितना दूध पैदा नहीं होता है, उससे चार गुना ज़्यादा इस्तेमाल होता है। तो आखिर यह चार गुना ज़्यादा दूध आता कहाँ से है ?
आपको बता दें की भारत में बिकने वाले दूध का 100% में से 68% हिस्सा मिलावटी होता है। और इतना ही हिस्सा दूध से बने अन्य उत्पादों का भी मिलावटी होता है।
मिलावट के लिए आमतौर पर जो चीज़ें सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जातीं हैं, वह हैं 'डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, ग्लूकोज़, सफ़ेद पेंट और रिफाइन तेल'।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी W.H.O. ने हाल ही में भारत सरकार के लिए एक सूचना जारी की थी जिसमें W.H.O. ने कहा था कि अगर दूध और इससे बनी चीज़ों में हो रही मिलावटों को नहीं रोका गया तो 2025 तक भारत के 87% लोग कैंसर और इसके जैसे दूसरे रोगों के शिकार होंगे।
एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया के सदस्य 'मोहन सिंह अहलूवालिया' का कहना है कि भारत में बिक रहे दूध का कुल 68.7 हिस्सा FSSAI यानी 'फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया' के द्वारा निर्धारित किये गए स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं है।
दूध में मिलावट का हाल यह है कि दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए और लम्बे समय तक फटने और ख़राब होने से बचाने के लिए 'डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च, ग्लूकोज़ और फॉर्मेलिन' जैसी ज़हरीली चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है।
अगर यह मिलावट तुरंत नहीं रोकी गयी तो आने वाले सात-आठ वर्षों में भारत के करीब 87% लोग कैंसर या उसके जैसी तमाम गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होंगे।

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