एनर्जी ड्रिंक्स और इसी प्रकार अन्य ड्रिंक्स में कैफीन काफी भरी मात्रा में इस्तेमाल की जाती। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्योंकि कैफीन दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाला साइकोएक्टिव ड्रग है, यह ध्यान और जागरूकता में इजाफा कर शारीरिक सक्रियता को बढ़ा देता है।
जबकि ऐसा भी कहा जाता है कि कैफीन से शुरू में चुस्ती पैदा होती है, फिर धीरे-धीरे सुस्ती होना शुरू हो जाती है। कैफीन याददाश्त को कम करने, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, और दिल की धड़कन को अनियमित बनाती है। इसके अलावा कैफीन के कारण हाई ब्लड प्रेशर, पेट के अंदरूनी ज़ख्म और पैदा होने वाले बच्चों में पैदाइशी खराबी देखी गयी है।
कुछ लोग इसे मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण मानते हैं। इसलिए हमें कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर प्रतिबन्ध लगाने की ज़रुरत है।
बच्चों और युवाओं को ऐसी ड्रिंक्स से बचना चाहिए जिसमें कैफीन मिली हो ताकि भविष्य में मोटापे और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकें।
ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ पेडियाट्रिक्स एंड चाइल्ड हेल्थ (आरसीपीसीएच) के प्रोफेसर रसेल वाइनर का कहना है, "लेकिन इसके साथ ही कैफीन व्यग्रता को बढ़ाता है और नींद में रुकावट पैदा करता है, तथा यह बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याओं से जुड़ा हुआ है."
हाल ही में किये गए अध्ययनों में पता चला है कि यह विकास कर रहे दिमागों पर चिंताजनक प्रभाव डालता है। वाइनर का कहना है कि, क्योंकि मनोवैज्ञानिक तनाव से जोखिम भरे व्यवहार का खतरा पैदा हो सकता है, जिसमें ड्रग का प्रयोग या अकादमिक प्रदर्शन में कमी शामिल है।
उन्होंने द बीएमजे जर्नल में प्रकाशित अपने पर्चे में कहा, "इसलिए बच्चों और युवाओं को कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, ताकि मोटापे और मानसिक स्वास्थ्य समस्या की जुड़वां महामारी को रोका जा सके"।
अगर सच में इस तरह की ड्रिंक्स पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जाता है, तो हमारे स्वास्थ्य का भविष्य बहुत खराब होगा।
इसलिए जितना हो सके हमें कैफीन के इस्तेमाल और उसके नुक्सान को लेकर लोगों को जागरूक करना होगा। और ऐसी सभी ड्रिंक्स पर रोक लगाने की कोशिश होनी चाहिए जिसमें कैफीन का इस्तेमाल किया जाता हो।

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