कहते हैं कि मस्जिद, मंदिर, गुरुद्वारा या चर्च यह ईश्वर के घर होते हैं। और ईश्वर के लिए हर इंसान सामान होता है। ईश्वर या अल्लाह अपने बन्दों में धर्म के आधार पर फर्क नहीं करता है। और उसके लिए दुनिया के सारे इंसान एक समान ही होते हैं, चाहे वह किसी भी धर्म के मानने वालों हों। ईश्वर सभी इंसानों के लिए दयालु हैं चाहे इंसान उसको माने या न माने।
आज के समय में ढेर सारे ऐसे मंदिर, गिरजाघर, गुरुद्वारे और मस्जिद मिलेंगी जो बिना किसी भेद भाव के इंसानियत की मदद करती नज़र आएँगी। और एक ऐसी ही मस्जिद के बारे में हम आपको बताएँगे जहाँ हर धर्म का व्यक्ति जाकर खाना खाता है।
मुंबई के ग्रांट रोड इलाक़े में ब्रिटिश शासनकाल से मौजूद बिलाल मस्जिद में कोई दिली सुकून पाने के लिए आता है, तो कोई धार्मिक शिक्षा हासिल करने के लिए आता है।
इस साल मार्च से तक़रीबन दो सौ ज़रूरतमंद इस मस्जिद से पेट भर खाना भी ले जा रहे हैं। सात महीने से चलने वाले इस लंगरे रसूल में केवल शाकाहारी भोजन ही बनता है। ऐसा इसलिए किया गया है, क्यूंकि इस इलाक़े में हिन्दू भी और मुस्लिम भी रहते हैं। शाकाहारी भोजन की वजह से किसी भी धर्म को मानने वाला व्यक्ति आकर खाना खा सकता है। और इससे किसी की भावना को भी चोट नहीं पहुंचेगी।
खाने में दो दिन सब्ज़ियों का पुलाव बनता है और बाकी दिन दो अलग तरह की खिचड़ी। मस्जिद के मुरीद दिल खोल कर इस काम में मदद करते हैं।
खाना रात साढ़े आठ बजे से नौ बजे के बीच मस्जिद के पास स्थित ईदगाह मैदान में बांटा जाता है।
इस लंगर में खाना खाने वाले व्यक्ति हर धर्म से आते हैं। और बिना किसी भेद भाव के सबको खाना दिया जाता है।
यहां पहुंचने वाले कई लोगों के लिए यह उनका दिन भर का पेट भरने वाला इकलौता भोजन होता है। मस्जिद के ट्रस्टी को उम्मीद है कि वह जल्द ही दो सौ के बजाए चार सौ लोगों को खाना खिला सकेंगे।

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