क्या आप भी बिस्तर में मोबाइल फ़ोन लेकर सोते हैं? तो पढ़िए इस खबर को


आज के दौर में मोबाइल किसके पास नहीं है? आज के समय में हम हर हाथ में मोबाइल फ़ोन हैं। मोबाइल फ़ोन को ज़रुरत कहिये या शौक लेकिन आज मोबाइल फ़ोन हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन चुका है और इसके बिना हम रह नहीं सकते। वैसे देखा जाए तो आज के समय में मोबाइल फ़ोन एक ज़रुरत भी है। क्यूंकि मोबाइल फ़ोन से आप न केवल अपने परिवार वालों और दोस्तों से जुड़े होते हैं, बल्कि आप स्मार्टफोन की मदद से सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा दुनिया भर की खबरे प्राप्त कर सकते हैं। दोस्तों आज के समय में आपके स्मार्टफोन में आपका पूरा बैंक खाता आ सकता है जिसकी मदद से आप किसी भी प्रकार का भुगतान और लेनदेन कर सकते हैं। मोबाइल फ़ोन से मिलने वाली इन सहूलियतों से आपको मोबाइल फ़ोन के महत्त्व का अंदाजा हो गया होगा। पिछले कुछ सालों से मोबाइल फ़ोन का उपयोग कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है। मोबाइल फ़ोन को लोगों ने अपनी आदत में शामिल कर लिया है। लोग जब भी फुर्सत पाते हैं अपना फ़ोन चालू कर लेते हैं, कुछ लोग तो काम करते हुए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। किसी भी चीज़ का हद से ज़्यादा इस्तेमाल आपको नुक्सान पंहुचा सकता है। बहुत से लोग बिस्तर में भी मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं। और बहुत बार मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते, करते सो जाते हैं और फ़ोन बिस्तर में उनके पास ही रहता है।


मोबाइल फ़ोन को अपने शरीर से ज़्यादा समय के लिए जुड़ा रखना हानिकारक हो सकता है। सोते समय मोबाइल फ़ोन आपके बिस्तर में नहीं होना चाहिए और अगर है भी तो दूर होना चाहिए या बंद होना चाहिए।
मोबाइल फ़ोन से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (विद्युत चुम्बकीय विकिरण) निकलता है। जिसकी माइक्रोवेव में 5 जी मोबाइल में 450-3800 मेगाहर्ट्ज और 24-80 गीगाहर्ट्ज़ की रेंज होती है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम (विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम) को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है आयनकारी विकिरण और गैर-आयनीकरण विकिरण (ionizing radiation and non-ionizing radiation) आयनकारी विकिरण खतरनाक हो सकता है। जिसमें यूवी, एक्स-रे, और गामा किरणें आतीं हैं। यह विकिरण डीएनए को डैमेज भी कर सकती हैं जिससे कैंसर भी हो सकता है। मोबाइल फ़ोन से निकलने वाला रेडिएशन गैर-आयनीकरण में आता है, जिसे माइक्रोवेव में मापा जाता है। कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिलें हैं कि मोबाइल फोन के उपयोग से मस्तिष्क के कैंसर या अन्य सिर के ट्यूमर होने का खतरा बढ़ जाता है।
फिर भी दोस्तों मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन से आपको जिल्द की कई बीमारियां हो सकती हैं। कहीं न कहीं मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन का एक्सपोज़र हमारे शरीर को नुक्सान पहुंचाता है। इसलिए मोबाइल फ़ोन को ज़्यादा समय के लिए हमारे शरीर के संपर्क में नहीं रखना चाहिए। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि इससे पुरुष प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, दो छोटे अध्ययनों से पता चलता है कि सेल फोन विकिरण मस्तिष्क ग्लूकोज चयापचय को कैसे प्रभावित करता है, असंगत परिणाम दिखाता है।
मोबाइल फ़ोन से निकलने वाले रेडिएशन से हलकी-हलकी गर्मी उत्पन्न करते हैं, जो हमारी जिल्द को नुक्सान पहुंचाती है। मोबाइल फ़ोन रेडिएशन हमारे टिश्यू कोशिकाओं को भी डिस्टर्ब करते हैं।
ऐसा नहीं है कि मोबाइल फ़ोन बिलकुल ही हमारी सेहत के लिए खतरा ही है, और इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। हमें बस थोड़ा एहतियात बरतना चाहिए और सोते जागते हर समय इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खासकर सोने के लिए बिस्तर में जाते समय ज़्यादा ध्यान देना चाहिए और फ़ोन लेकर नहीं सोना चाहिए। सोने से पहले या उसे अपने शरीर से दूर कर दें या फिर बंद करके ही सोएं। कुछ लोग तो इसका इंटरनेट डाटा ऑन करके ही अपने पास रखकर हैं, जो बिलकुल नहीं करना चाहिए।

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