एक सवाल अक्सर कुछ लोगों के मन में आता है कि इस्लाम में क्यों केवल पुरुषों को ही एक साथ चार शादी करने के अनुमति दी गई है, महिलाओं को क्यों नहीं?
खैर पुरुषों को एक शर्त पर ही एक साथ चार शादी करने की इजाज़त दी गई है कि पुरुष चरों पत्नियों के बीच इन्साफ को बरकरार रखेगा,अन्यथा पुरुष एक ही शादी करे। यह क़ुरआन में साफ़ शब्दों में कहा गया है।
अगर ऐसी शादी झगडे, या फसाद का कारण बनें तो ऐसी शादी बिलकुल जाएज़ नहीं है इस्लाम में।
फिलहाल हम बात करेंगे कि क्यों केवल एक साथ चार शादियों का अधिकार केवल पुरुषों को ही है महिलाओं को नहीं?
यह सवाल कोई नया या आज के समय का नहीं है। इस्लामी खिलाफत के समय में भी यह सवाल कुछ औरतों ने उठाया था। जिसके बारे में हम आपको बताएँगे।
यह खिलाफत के समय की बात है, एक बार खलीफा के दरबार में कुछ औरतें आईं और हैरत से यह पूछने लगीं कि इस्लाम में मर्द एक ही समय में चार-चार शादियां कर सकता है, लेकिन यह आज़ादी इस्लाम में औरतों को क्यों नहीं है? वह एक ही समय में चार शादियां क्यों नहीं कर सकतीं?
सवाल पर गौर करते हुए सब लोग इधर-उधर देखने लगे और कोई स्पष्ट जवाब न दे सका।
इतने में वहां इमाम अली इब्ने अबी तालिब को बुलाया गया। और यही सवाल उनसे पूछा गया। तो इमाम अली ने अपने गुलाम क़म्बर को कहा "क़म्बर एक पानी का बर्तन लेकर आओ"।
क़म्बर ने जैसे ही पानी का बर्तन सामने रखा इमाम अली ने औरतों से कहा कि चार औरतें अपने हाथों में चार कूज़े (पानी रखने की थैली) लेकर आएं। और इस पानी से अपने-अपने हिस्से का पानी निकालें। चरों औरतों ने अपने अपने कूज़े भरे। इमाम अली ने क़म्बर से कहा "इस पानी के बर्तन को खाली करके लाओ"। बस खाली करके जैसे ही उस बर्तन को रखा गया, इमाम अली ने फिर से औरतों से कहा "अब जो तुम्हारे हिस्से का पानी है फिर से इस बर्तन में डाल दो"।
उन औरतों ने अपने अपने हिस्से का पानी उस बर्तन में डाल दिया। बस यह होना था तो इमाम अली ने कहा "अब जो पानी तुम्हारे हिस्से का था इस पानी में ढूंढ के अलग-अलग करके अपने पास फिर से रखों"।
वे हैरत से इमाम अली से कहने लगीं "या अली यह तो सारा पानी मिल गया अब इनकी पहचान नामुमकिन है।
तो इमाम अली ने कहा "तुम अपने हिस्से का पानी नहीं पहचान सकती तो बताओ जब चार-चार पति रखोगी, तो औलाद कैसे पहचानोगी"? अपने बेटे को क्या बताओगी कि उसका बाप कौन है?
वे औरतें सर झुकाने लगीं और कहने लगीं "या अली हमें हमारा जवाब मिल गया"।
इस सवाल का स्पष्ट जवाब आज से 1400 साल पहले ही इमाम अली ने दे दिया था। और हम उम्मीद करते हैं कि जिनके भी मन में यह सवाल रहा होगा अब उसका जवाब मिल गया है।

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