जैसा कि हम सब को पता है कि पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन वित्तीय लेन -देन का चलन कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया है। डिजिटल वित्तीय लेन -देन से ग्राहकों को काफी राहत मिली, उनके हर छोटे-बड़े लेनदेन बिना बैंक गए चुट्कीयों में फटाफट हो जाते हैं। शुरू-शुरू में जब लोगों ने ऑनलाइन-लेनदेन की प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चालू किया तो लोगों को लगा कि यह उनके लिए काफी फायदेमंद और आसान है। लेकिन कुछ समय के बाद ही इसके दोष नज़र आने लगे, और लोगों को इसके नुक्सान के बारे में भी पता चला। ऑनलाइन लेनदेन प्रक्रिया में जो सबसे बड़ा दोष और नुक्सान है, वह है धोखाधड़ी। पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन लेनदेन को लेकर ढेरों मामले सामने हैं। बैंक होने वाली इन धोखाधड़ियों से निपटने और ग्राहकों को इनसे बचाने के लिए समय-समय पर अपने नियमों में बदलाव करते रहते हैं। जैसा कि आप लोगों को पता होगा कि हाल ही में डेबिट कार्ड से जुड़े धोखाधड़ी के बहुत सारे मामले आये, जिसके बाद भारतीय स्टेट बैंक व अन्य बैंकों ने फैसला लिया कि अब से बिना चिप वाले डेबिट कार्ड नहीं चलेंगे।
इसके चलते बैंकों ने पुराने बिना चिप वाले डेबिट कार्ड को बंद कर दिया। जैसे-जैसे बैंक ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए नये-नये तरीके ढूंढता है वैसे-वैसे ही जालसाज़ ग्राहकों के पैसे लूटने के लिए नये-नये हथकंडे ढूंढ लेते हैं।
अभी हाल ही में एक नया मामला सामने आया है, जिसमें इन जालसाज़ों ने एक ग्राहक के खाते से मोबाइल ओटीपी की मदद से 11 लाख रुपए उड़ा लिए। यह मामला तब सामने आया जब सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के एक ग्राहक ने पुलिस को यह शिकायत दी कि उसके बैंक खाते से उसकी बिना जानकारी के 11.5 रुपए निकाल लिए गए हैं।
पुलिस ने इस मामले की तहकीकात शुरू की और पाया कि पीड़ित का मोबाइल नंबर, जो उसके बैंक खाते में रजिस्टर था उसको बदल दिया गया था, और इस प्रकार बदमाशों ने उस व्यक्ति के खाते से ओटीपी की सहायता से अपने खाते में पैसे ट्रांसफर कर लिए।
इस प्रकार के फ्रॉड कैसे होते हैं?
सबसे पहले ऐसे जालजासों का गिरोह एक टारगेट को चुनता है, फिर किसी तृतीय पक्ष की मदद से उसकी वैयतिक सूचना को प्राप्त करता है। जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी इत्यादि। आपके पर्सनल डाटा को प्राप्त करने के बाद जालसाज़ इनको लेकर बैंक जाता है। उसके बाद जिस व्यक्ति को यह टारगेट करते हैं, उसका मोबाइल नंबर बदलने के लिए निवेदन फॉर्म भरते हैं। यह लोग टार्गेटेड व्यक्ति का वह मोबाइल नंबर बदल देते हैं जो उसके बैंक खाते में पहले रजिस्टर होता है। और इनके इस काम में बैंक के आधिकारिक लोग भी इनकी सहायता करते हैं। एक बार जब किसी व्यक्ति का उसके खाते से मोबाइल नंबर बदल दिया जाता है, तो यह लोग मोबाइल ओटीपी की सहायता से उस व्यक्ति के खाते से सारे पैसे ट्रांसफर कर लेता है।
ज़यादातर नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके ही किसी व्यक्ति के खाते से पैसे उड़ाये जाते हैं। क्यूंकि इसके लिए उनको केवल एक ओटीपी की ही आवश्यकता होती है, जो उनको पीड़ित के मोबाइल नंबर बदल देने पर आसानी से मिल जाता है।
इसलिए हम आपसे निवेदन करेंगे कि आप बिलकुल सतर्क रहिये और किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल नंबर न दीजिये। अगर आपके साथ धोखाधड़ी कोई मामला पेश आता है, तो तुरंत इसकी शिकायत बैंक और पुलिस को करें।

0 Comments