हिन्दू धर्म जो अपने असली नाम सनातन धर्म से भी जाना जाता है इसका इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना है। और इसका इतिहास मुख्य रूप से भारत की धरती से जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म में वेदों को मूल धार्मिक ग्रन्थ होने का दर्जा हासिल है। हिन्दू धर्म को विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है। हिन्दू मान्यता के अनुसार वेद, उपनिषद आदि ग्रन्थ अनादि, नित्य हैं, ईश्वर की कृपा से अलग-अलग मन्त्रद्रष्टा ऋषियों को अलग-अलग ग्रन्थों का ज्ञान प्राप्त हुआ जिन्होंने फिर उन्हें लिपिबद्ध किया। वेदों के बाद अगर कोई साहित्य आता है तो वह हैं रामायण और महाभारत, भगवद गीता, पुराण, मनुस्मृति, धर्मशास्त्र और धर्मसूत्र, आगम शास्त्र।
बहुत से विद्वानों का मानना है की हिन्दू धर्म का इतिहास केवल पौराणिक कथा है जिसका अस्तित्व केवल एक कल्पना है।
ईरान के इस्लामिक स्कॉलर्स ने वेदों पर रिसर्च अपना अनुसंधान चालु किया ताकि पता लगाया जा सके कि हिन्दू धर्म का इतिहास कल्पना है या हकीकत। ईरानी विद्वानों ने पाया की जिस प्रकार की लिपि वेदों में मौजूद है वैसी लिपि किसी आम इंसान की बस की नहीं है। ईरानी स्कॉलर्स ने बताया कि वेदों की लिपि ईश्वरीय लिपि है जो क़ुरआन की लिपि से मिलती जुलती नज़र आती है।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि जो बातें क़ुरआन में बताई गयी हैं वहीं बातें वेदों में भी बताई गयी हैं बस केवल अंदाज़ और भाषा का अंतर है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की तहरीर उस समय में कोई आम व्यक्ति नहीं लिख सकता था।

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