दोस्तों जहाँ हम आज महिला सशक्तिकरण और समानता के अधिकार की बात कर रहे हैं। और महिलाओं को उनके अधिकार और न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं और उनको समानता के ढांचे में डालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हमारा समाज सुधर सके और हमारा समाज उन्नत हो सके।
वहीं इन अधिकारों की बात आज से 1400 पहले ही इस्लाम की एक महान हस्ती ने की थी और मर्दों को नसीहत दी की कभी वह इन अधिकारों का हनन न करें, नहीं तो अगर महिलायें बग़ावत पर उतर आएं तो इंसान अपना चैन और सुकून भूल जाएगा।
इमाम अली के पास एक व्यक्ति आता है, और कहने लगा "या अली आने वाले समय में घर की बेसूकूनी, बर्बादी और इंसान की परेशानी का सबसे बड़ा कारण क्या होगा"?
तो इमाम अली ने उस व्यक्ति को जवाब देते हुए कहा "ऐ शख्स आने वाले समय में इंसान की सबसे बड़ी बेचैनी और परेशानी का कारण औरत की बग़ावत होगी"।
उस व्यक्ति ने पूछा "या अली औरत की बग़ावत क्यों होगी"?
तो इमाम अली ने कहा औरत की बग़ावत इसलिए होगी क्यूंकि मर्द औरतों के अधिकारों को कुचलने लगेंगे, अपनी पत्नियों को दासी समझने लगेंगे, उनका अपमान करेंगे और इस प्रकार मनुष्य अपने हाथों से ही अपने सुकून को दफना देगा।
उस व्यक्ति ने पूछा या अली औरत के कौन से अधिकार हैं जो उनको देना मर्द के लिए ज़रूरी है?
तो इमाम अली ने कहा पहला अधिकार मर्द जब भी औरत से बात करे नरमी से बात करे, उसकी इज़्ज़त करे, उससे प्यार करे, और कभी भी किसी के सामने उसका अपमान न करे। जो बात उसको समझाना चाहे प्यार से समझाए क्यूंकि किसी की गलती की सुधार हमेशा अकेले में ही की जाती है, जो सुधार सबके सामने की जाती है, तो वह सुधार नहीं है बल्कि वह मनुष्य को बग़ावत की ओर ले जाती है।
दूसरा अधिकार: अल्लाह ने औरत को भावनाओं की मट्टी से बनाया है, इसलिए वह हर पल किसी न किसी भावना में डूबी रहती है।
मर्द को चाहिए कि मर्द अपनी औरत की छोटी-छोटी बातों का शुक्रिया अदा करता रहे।
उसके छोटे-छोटे अच्छे कामों की तारीफ करता रहे, बार बार अपनी मुहब्बत और सच्चाई का इज़हार करता रहे, ताकि औरत की भावना अपने मर्द की तरफ खिंचती रहे, किसी ग़ैर की तरफ नहीं।
तीसरा अधिकार: मर्द को चाहिए कि घर के कामों में अपनी औरतों पर दया करे, और उनका साथ दे, उनका हाथ बटाए।
चौथा अधिकार: पति कभी अपनी पत्नी का मज़ाक न उड़ाए और जो जो चीज़ें उसको न आती हों उसको उसकी शिक्षा दे, इस प्रकार से कि कभी भी पत्नी को हीनता का एहसास न हो।
पांचवां अधिकार: अपनी औरत का ख़याल रखे, उसका एहसास करे और उसकी हर जीवन की ज़रुरतें पूरा करने की कोशिश करता रहे,जिसकी हर औरत मांग करती है।
ऐ शख्स याद रखना जब मर्द इन पाँचों अधिकारों को पूरा करेंगे तो औरत कभी भी लापरवाह नहीं होगी।
अगर हम आज के समय के हालत को देखें तो हमें पता चलता है कि आज के हालत कुछ ऐसे ही नज़र आते हैं कि जहाँ औरतों को यह पांच अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। जिसके कारण औरतों के बग़ावत जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। अगर हमें सच में चैन और सुकून चाहिए तो हमें औरतों के अधिकारों का ख़याल करना चाहिए। चाहे फिर वह माँ हो बहन हो बेटी हो या बीवी हो।

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