अमेरिका का मुसलामानों के प्रति सख्त रवैय्ये को लेकर कुछ लोग सवाल उठाते हैं कि अमेरिका की इस्लाम और मुसलामानों से क्या दुश्मनी है ?
अमेरिका दुनिया का अकेला ऐसा देश है जो हर देश पर अपनी मनमानी चलाने की कोशिश करता है। अमेरिका चाहता है कि दुनिया के सारे देश उसके इशारे पर चलें। आपको अगर याद होगा तो हम आपको बताना चाहेंगे की जब 1995 में नरसिम्हा राव की सरकार में इंडियन आर्मी पोखरण में परमाणु परिक्षण करने जा रही थी तो अमेरिका ने अड़चन डाल कर उसे रुकवा दिया था। यह अमेरिका की मनमानी नहीं तो और क्या है ? अमेरिका चाहता है कि हर देश उसके अधीन रहे इसलिए आये दिन वह किसी न किसी देश पर पाबंदियां लगा देता है जो उसके आदेश को नहीं मानता है तो।
यह तो बात थी अमेरिका की अब बात करते हैं इस्लाम कि। इस्लाम इंसानों को 'मसावात' से जीने का हुक्म देता है। मसावात का मतलब होता है बराबरी इस्लाम में कोई आदमी धन के आधार पर बड़ा छोटा नहीं होता है। इस्लाम साम्राजी ताक़तों से लड़ने की प्रेरणा देता है और हर आदमी को हर तरीके की आज़ादी से जीने के लिए प्रेरित करता है।
अगर अमेरिका खुद परमाणु हथियार बना सकता है और रख सकता है तो दुसरे देशों को मना क्यों करता है ? इस्लाम इंसान की ज़िन्दगी को साम्राज्यीय ताक़तों की पाबंदियों से आज़ाद कराने की प्रेरणा देता है। इसलिए कुछ मुस्लिम देश जैसे ईरान, सीरिया, लेबनॉन अमेरिका की मनमानियों को नहीं मानते हैं। और इसी वजह से अमेरिका को इस्लाम से दुश्मनी है।

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