आपने यह गौर किया होगा कि जब भी कोई पैग़म्बर मुहम्मद की तस्वीर बनाता है तो, मुस्लिम समाज इकट्ठा होकर तस्वीर बनाने वाले का विरोध करता है। न केवल विरोध करता है बल्कि मुसलामानों का आक्रोश इतना बढ़ जाता है कि वह तस्वीर बनाने वाले के खिलाफ वरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतर आता है। मुसलमान तब तक तस्वीर बनाने वाले का बहिष्कार और उसके खिलाफ विरोध करता है, जब तक तस्वीर बनाने वाले के ऊपर कोई क़ानूनी कार्यवाही न हो जाए। या फिर वह अपनी इस ग़लती की माफ़ी न मांग ले।
लेकिन हम यह सोचते हैं कि आखिर मुसलामानों को पैग़म्बर मुहम्मद की तस्वीर से आपत्ति क्यों है?
इस्लाम के अलावा आपको हर धर्म के संस्थापक की प्रतिमा या तस्वीर आपको देखने को मिल जाएगी। पैग़म्बर मुहम्मद से पहले आये अन्य धर्मों के संस्थापकों की आपको तस्वीर और प्रतिमा भी देखने को मिलती हैं। जैसे बुद्धा, ईसा मसीह इत्यादि इनकी आपको तस्वीरें भी मिलेंगी और प्रतिमा भी। लेकिन उनके बाद आने वाले पैग़म्बर मुहम्मद की न तो तस्वीर मिलती है और न ही प्रतिमा।
इसकी एक बड़ी वजह है और वह वजह यह है कि पैग़म्बर मुहम्मद से पहले आने वाले सभी धर्मों के संस्थापकों का केवल एक ही उद्देश्य होता था। और वह उद्देश्य यह होता था कि आप किसी व्यक्ति की पूजा न करके केवल एक ईश्वर की पूजा करें। लेकिन उनके इस मक़सद को लोग बाद में भुला कर खुद उन्ही की पूजा करने लग जाते थे। जिनकी वजह से उनकी प्रतिमा भी बनायीं गयीं और तस्वीरें भी।
पैग़म्बर मुहम्मद ने भी यह सन्देश दिया कि की ईश्वर के अलावा किसी की भी पूजा नहीं की जा सकती है। उनको यह भी पता था कि उनके जाने के बाद ऐसा भी हो सकता है कि लोग उन्हें ही ईश्वर मान बैठें और उनकी ही पूजा करने लगे। और उनकी पूजा करने के लिए लोगों को उनकी तस्वीर या प्रतिमा की ज़रूरत पड़ेगी। इसिलए पैग़म्बर ने न तो किसी को अपनी तस्वीर बनाने दी और न ही अपनी प्रतिमा या मूर्ती बनाने दी ताकि लोग आगे चलकर कहीं उन्हीं की पूजा न करने लग जाएँ।
पैग़म्बर मुहम्मद ने अपने समय में अपनी तस्वीर, और प्रतिमा बनाने पर रोक लगायी थी। और इसी वजह से मुसलमान इसको पसंद नहीं करते हैं कि कोई उनकी तस्वीर बनाये। क्यूंकि जब खुद पैग़म्बर मुहम्मद ने इसको मना किया था तो उनके मानने वाले मुसलमान इसको कैसे स्वीकार करेंगे।

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