दुनिया के हर धर्म के अपने अपने कुछ नियम और उसूल हैं। और इस्लाम भी उन धर्मों में से एक है जिसके पास शासन चलाने से लेकर इंसान के जीवन के हर पहलु से जुड़े क़ायदे और क़ानून हैं। इस्लाम में इंसान के पैदा होने से मरने तक के लिए क़ायदे, क़ानून और तौर तरीके बता दिए हैं। इस्लाम में ऐसे बहुत से काम हैं जिनको करने से सख्त मना किया गया है। तो हम आपको ऐसे 5 कामों के बारे में बताएँगे जो इस्लाम की नज़र में ग़लत हैं और उनको नहीं करना चाहिए।
शराब
शराब को इस्लाम में हराम क़रार दिया गया है। और इससे दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। न केवल शराब इस्लाम में बुरी चीज़ मानी जाती है बल्कि इस्लाम के अनुसार शराबी व्यक्ति से भी दूर रहना चाहिए और उसके बहिष्कार करना चाहिए। इस्लाम में न केवल शराब पीना ही वर्जित है बल्कि इसको खरीदना और बेचना भी हराम है।
जुआ
इस्लाम में जुआ खेलना वर्जित है। इस्लाम की नज़र में हर वह खेल जुआ है जिसमें बाज़ी या शर्त लगाई जाए, जैसे कि अगर कोई व्यक्ति 500 रूपए लगा रहा है इस शर्त पर कि अगर वह जीतेगा तो उसे 1000 मिलेंगे और अगर हारेगा तो उसके पैसे चले जायेंगे, तो इस्लाम के नज़र में यह जुआ हुआ। और इस प्रकार के खेल को इस्लाम खेलने की अनुमति नहीं देता है।
चोरी
इस्लाम में चोरी करना एक बहुत बड़ा पाप है, और यह एक ही शर्त पर माफ़ किया जाता है कि अगर जिसका सामन चोरी हुआ है वह चोर को माफ़ कर दे।
अन्यथा इस्लाम में चोरी करने की बहुत कड़ी सज़ा दी जाती है। अगर कोई व्यक्ति चोरी करते पकड़ा जाता है तो उसको सजा मिलेगी और उसके दोनों हाथ काट दिए जायेंगे।
पीठ पीछे बुराई
इस्लाम में उस व्यक्ति की कड़ी निंदा की गई है, जो पीठ पीछे किसी की बुराई करता हो, या फिर किसी के दोष गिनाता हो। इस्लाम में इस पाप को ग़ीबत और चुगलखोरी कहते हैं। और ग़ीबत इस्लाम में सरासर हराम है। इसके अलावा इस्लाम ऐसे लोगों से बचने के लिए कहता है, जो दूसरों की बुराई और दोष किसी अन्य के सामने बताता हो। इस्लाम के अनुसार यह इतना बड़ा पाप होता है कि खुद ईश्वर भी इसको माफ़ नहीं करता है जबतक उस व्यक्ति ने न माफ़ किया हो जिसकी बुराई या दोष किसी अन्य के सामने बयान किया गया है।
झूठ
झूठ बोलना इस्लाम में ही नहीं हर धर्म में पाप माना जाता है। इस्लाम के अनुसार झूठ सभी पापों की जड़ है और हर पाप इसी से निकलता है। इसलिए क़ुरान में भी आया है कि "झूठों पर अल्लाह की लानत हो"। इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि हर फसाद की जड़ झूठ ही होता है। और हर फितना झूठ से ही शुरू होता है।
तो यह थे वह पांच काम जिनको इस्लाम में हराम और वर्जित क़रार दिया गया है। और इसके करने वाले को जीवन में और मरने के बाद भी सजा मिलेगी। जैसे अगर कोई व्यक्ति चोरी करता है तो उसके लिए दुनिया में ही उसकी सज़ा निर्धारित की गई है जो उसको मिलनी चाहिए। इसी प्रकार अगर वह अन्य पाप जैसे शराब, झूठ, ग़ीबत, जुआ को करता है तो उसको मरने के बाद सजा मिलेगी।

0 Comments