कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनकर ही लोग डर जाते हैं। क्यूंकि यह एक ऐसी बीमारी है जो किसी को नहीं छोड़ती चाहे अमीर हो या गरीब इसके चपेट में आने के से हर कोई डरता है। क्यूंकि इस बीमारी के ठीक होने की कोई गारंटी नहीं होती है। कैंसर के उपचार तो बहुत हैं लेकिन यह बीमारी उपचार के बाद भी वापिस आ जाती है। इसलिए यह दुनिया की उन घातक और जानलेवा बीमारियों में से एक है जिसका इलाज होने पर भी लाइलाज है। कोई नहीं चाहेगा कि वह या उसका कोई चाहने वाला इन मनहूस बीमारी का शिकार हो। लेकिन कई बार दुर्भाग्य से हमारी ही कुछ ग़लतियों के कारण हम इस खतरनाक बीमारी का शिकार बन जाते हैं। तो हम आपको उन्हीं ग़लतियों के बारे में बताएंगे जिनसे आपको हर हाल में बचे रहना है।
शराब
दोस्तों एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में होने वाली हर 20 मौतों में एक मौत का कारण शराब होती है। शराब के कारण सड़क हादसे से होते ही हैं साथ ही इससे जिगर और गुर्दे की भी बीमारियां होती हैं। शराब न केवल आपके गुर्दे और जिगर को खराब करता है बल्कि यह आपके डीएनए में होने वाले परिवर्तन का भी कारण बनता है। शराब के अत्यधिक सेवन से आपको जिगर का कैंसर भी हो सकता है इससे न केवल आपके जिगर को खतरा होता है, बल्कि यह आपकी पाचन तंत्र क्रिया को भी ख़राब कर देता है, जिसकी वजह से अल्सर या बवासीर भी हो सकती है।
जो लोग बहुत अधिक शराब का सेवन करते हैं उन्हें कैंसर का भी खतरा हो सकता है। जो लोग अक्सर पीते हैं उनमें मुंह, गले, अन्नप्रणाली
कोलन और जिगर के कैंसर का अधिक खतरा होता है। जो लोग नियमित रूप से पीते हैं और तम्बाकू का उपयोग करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा बहुत अधिक होता है।
धूम्रपान
धूम्रपान आपके स्वास्थ्य को इतना नुक्सान पंहुचा सकता है कि आप उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। धूम्रपान से मुंह, गले, और एसोफैगस के कैंसर का खतरा बढ़ता है। धूम्रपान करने वालों में अग्नाशयी कैंसर की उच्च दर भी होती है। इसके साथ साथ धूम्रपान आपके पूरे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। निकोटिन रक्त वाहिकाओं को कसने का कारण बनती है, जो रक्त के प्रवाह को प्रतिबंधित कर देती है।
धूम्रपान का इंसुलिन पर भी असर पड़ता है, जिससे यह अधिक संभावना होती है कि आप इंसुलिन प्रतिरोध विकसित करेंगे। इससे आपको टाइप 2 मधुमेह और इसकी जटिलताओं के जोखिम में वृद्धि होती है।
धूम्रपान के अधिक स्पष्ट संकेतों में त्वचा में परिवर्तन होना शामिल हैं। धुंए में मौजूद तम्बाकू के पदार्थ वास्तव में आपकी त्वचा की संरचना को बदलते हैं। एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि धूम्रपान त्वचा कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
गुटखा
गुटखा ज़्यादातर आपको उत्तरी भारत में ही मिलेगा और बहुत से लोगों को इसकी बुरी तरह से लत लगी हुई होती है, जिसके चक्कर में वह अपने स्वास्थ्य का धयान रखना ही भूल जाते हैं।
गुटखा सुपारी, कत्था, तंबाकू, पैराफिन मोम, कास्टिक चूना से तैयार किया जाता है जिसका स्वाद मीठा और सुगंधित होता है। और यह आमतौर पर भारत के कुछ हिस्सों में उपयोग किया जाता है।
इसमें कैंसरजन होते हैं, जिन्हें मौखिक कैंसर और अन्य गंभीर नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभावों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है। और इसलिए भारत में यह भी सिगरेट के समान प्रतिबंधों और चेतावनियों के अधीन हैं।
कुछ लोगोनो का मानना है कि गुटखा हानिकारक नहीं है, जबकि डॉक्टर, विशेष रूप से कैंसर विशेषज्ञ, कहते हैं कि गुटखा का सेवन तंबाकू के किसी भी अन्य रूप से अधिक हानिकारक है
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब कोई व्यक्ति गुटखा को चबाता है, तो इसका मिश्रण सीधे मौखिक गुहा के माध्यम से सिस्टम में प्रवेश करता है। जबकि धूम्रपान के मामले में, हानिकारक रसायनों का 20 प्रतिशत फेफड़ों तक पहुंचता है और 80 प्रतिशत बाहर निकल जाता है।
अस्वास्थ्यकारी आहार
कुछ विषेश प्रकार के खाद्य पदार्थ विशिष्ट कैंसर से जुड़े हुए हैं। अध्ययनों से पता चला है कि लाल या संसाधित मांस खाने वाले व्यक्तियों में स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और अग्नाशयी कैंसर के विकास का उच्च जोखिम होता है। कोलोरेक्टल कैंसर के विकास के लिए कई जोखिम कारकों में वसा, शराब, लाल और संसाधित मांस का उच्च सेवन, मोटापा और शारीरिक व्यायाम की कमी शामिल है। उच्च नमक आहार गैस्ट्रिक कैंसर से जुड़ा हुआ है। आहार में फल और सब्जियों से भरपूर आहार को चुनें। साबुत अनाज और आहार में हलकी प्रोटीन का चयन करें।
अत्यधिक सूर्य एक्सपोजर से बचें
सूरज से हानिकारक पराबैंगनीकिरण (यूवी) किरणें त्वचा के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। जब भी आप धुप में निकलें तो सुरक्षात्मक कपड़े पहनें या सनस्क्रीन लगाएं। सूरज की किरणों में पराबैंगनीकिरण पाई जाती है जिसके अत्यधिक एक्सपोज़र से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
प्लास्टिक बोतल का उपयोग और डिब्बाबंद चीज़ों का उपयोग
सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल हेल्थ (सीईएच) ने 'किकिंग द कैन' नामक एक रिपोर्ट जारी की है।
किकिंग द कैन का मतलब है डब्बाबंद चीज़ों को बाहर करो।
इसमें सीईएच के अधिकारियों का कहना है कि इस साल के शुरू में इस्तेमाल किए गए डिब्बाबंद सामानों में 40 प्रतिशत रासायनिक बिस्फेनॉल ए (बीपीए) के स्तर को पता लगाया गया है।
बिस्फेनॉल ए ऐसा हानिकारक रसायन है जिसके बारे में पिछले शोध में पता लगाया गया है की यह रसायन जन्म दोष, साथ ही साथ स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मधुमेह, और हृदय रोग से जुड़ा है।
इसलिए अगर आप प्लास्टिक के डब्बाबंद सामानों का इस्तेमाल कर रहे हैं तो छोड़ दें और प्लास्टिक के बने बोतलों का भी इस्तेमाल बंद कर दें। यह सबसे ज़्यादा खतरनाक तब होता है जब हम डब्बाबंद भोजनों का सेवन करते हैं या फिर प्लास्टिक की बोतल में पैक पानी को पीते हैं।
संसाधित खाद्य पदार्थ
संसाधित खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ आहार अतिरिक्त चीनी (और एचएफसीएस) का सबसे बड़ा स्रोत हैं। चीनी बहुत अस्वास्थ्यकर है और अधिक मात्रा में सेवन होने पर चयापचय पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आश्चर्य की बात नहीं है, चीनी का सेवन दुनिया के कुछ प्रमुख घातक बीमारियों के साथ दृढ़ता से जुड़ा हुआ है, जैसे हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा और कैंसर।
यह इंसुलिन प्रतिरोध, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स, हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर और यकृत और पेट की गुहा में वसा संचय में वृद्धि कर सकता है।
यह थी वह चीज़ें जिनके इस्तेमाल से कैंसर होता है। हालांकि ऐसा ज़रूरी नहीं है कि केवल यह कारण हों कैंसर होने का लेकिन यह कुछ ऐसे कारण हैं जिनको हम खुद से नियंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा कैंसर होने की सबसे बड़ी वजह, कोशिकाओं के भीतर डीएनए में परिवर्तन (उत्परिवर्तन) कैंसर का कारण होता है। हमें अपने वातावरण का भी धयान रखना होगा क्यूंकि अगर हमारा वातावरण प्रदूषित होता है तो उससे कई प्रकार के ज़हरीले केमिकल तत्व पर्यावरण में घुल मिल जाते हैं और फिर वह सांस द्वारा हमारे शरीर में चले जाते हैं, और इस प्रकार हमें तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

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