यह बात बड़ी अजीब है की कुछ लोग ऐसा भी सोच ले जाते हैं, की इस्लाम चौदह सौ साल पहले अस्तित्व में आया तो अल्लाह भी चौदह सौ साल पहले आया, और उससे पहले अल्लाह जैसी कोई दैव्य शक्ति मौजूद ही नहीं थी। इसलिए ये कैसा हो सकता है की अल्लाह ने दुनिया बनायीं और सारे जीवों को पैदा किया, तो ये संसार तो करोड़ों वर्ष से है जबकि अल्लाह १४ सौ साल पहले पैदा हुए तो क्या उससे पहले कोई ईश्वर था ही नहीं?
यह बात किसी बड़े मज़ाक से कम नहीं है। और ये नतीजा है की हमने पढ़ा लिखा नहीं और अधूरे ज्ञान के चक्कर में फिर से कश्मकश में आ गए।
अगर हम पढ़े होते तो ऐसा तर्क कभी नहीं देते। क़ुरान में २६ नबियों के नाम हैं। जो की पैग़म्बर मुहम्मद से सदियों पहले आये थे।
फिर तो ये सोचने वाली बात हो गई की आखिर इस्लाम की १४ सौ साल पुराने इतिहास में उससे हज़ारों वर्ष पहले के नबियों के बारे में क्यों बताया जा रहा है ?
और नबी तो साफ़ शब्दों में उसी को कहते हैं जो खबर पहुँचता हो। मतलब ईश्वर सन्देश इंसानो बताता हो। और लोगों को पाप और पुण्य के बारे में बताता हो, और सही रास्ता दिखाता हो, लोगों को कर्म करने की नसीहत देता हो।
अगर हम क़ुरान पढ़ें तो यहां हमको सृष्टि के पैदा होने से लेकर दुनिया में इंसान के आगमन तक का ज्ञान प्राप्त होता है। क़ुरान में ये भी बताया गया है की ईश्वर ने किस प्रकार दुनिय में पहला इंसान बना कर भेजा।
उस पहले इंसान का नाम आदम था,जिसको मुसलमान अपना पहला नबी मानते हैं। फिर ये बात और हैरत में डालती है की, धरती पर आने वाले पहले व्यक्ति को मुसलमान अपना पहला नबी मानते हैं और वहीँ कुछ लोग इस्लाम और ईश्वर को १४ सौ साल पुराना समझते हैं।
क़ुरान में कई नबियों का उल्लेख है की जिनके बारे में बताया गया है की, अल्लाह ने उनको इंसानो को सही रास्ता दिखाने के लिए भेजा था।
इनमे आदम,नूह,इब्राहिम,युसूफ,यूनुस,ईसा जैसे नबियों के नाम मिलते हैं।
फिर जो लोग १४ सौ साल की रट लगाए हुए हैं, उनको खुद अपने ज्ञान को बढ़ाना चाहिए ताकि इस ग़लतफ़हमी से बहार आ सकें। १४ सौ साल पहले केवल पैग़म्बर मुहम्मद का जन्म हुआ, और यह आखिरी नबी हैं, इनके बाद कोई नहीं आएगा, और यह नबियों में सर्वोच्च हैं। इससे पहले जितने भी नबी आते रहें हैं उनके बाद में आने वाले नबी के बारे में वो पहले ही भविष्यवाणी या पूर्व-सूचना दे देते थे।

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bahot khhob
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